परमार्थ निकेतन में प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पर विशेष यज्ञ, राष्ट्र को समर्पित हुई गंगा आरती
स्वामी चिदानन्द सरस्वती के सान्निध्य में हुआ आयोजन, राष्ट्र की समृद्धि, शांति और विश्वकल्याण की कामना; प्रधानमंत्री के दीर्घायु एवं उत्तम स्वास्थ्य के लिए की गई प्रार्थना
ऋषिकेश। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर बुधवार को परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में विशेष यज्ञ का आयोजन किया गया। प्रातःकाल आयोजित यज्ञ और सायंकालीन मां गंगा की दिव्य आरती को राष्ट्रसेवा के 25 वर्षों को समर्पित किया गया।

परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानन्द सरस्वती के सान्निध्य में ऋषिकुमारों ने मां गंगा के पावन तट पर भारत की समृद्धि, शांति, प्रगति, सांस्कृतिक चेतना एवं विश्वकल्याण की मंगलकामना की। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, ऊर्जा और राष्ट्रसेवा के लिए प्रार्थना की गई।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष केवल समय का एक कालखंड नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा, संकल्प, साधना और समर्पण की यात्रा हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात से शुरू हुई उनकी सार्वजनिक जीवन की यात्रा आज विकसित भारत और विश्वकल्याण के संकल्प तक पहुंची है।
उन्होंने कहा कि इन वर्षों में सेवा, सुशासन, राष्ट्र प्रथम और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर केंद्रित विभिन्न पहलों और नीतिगत निर्णयों ने भारत के विकास तथा वैश्विक भूमिका से जुड़े विमर्श को प्रभावित किया है। उन्होंने डिजिटल इंडिया, यूपीआई, जी20, आत्मनिर्भर भारत, नई शिक्षा नीति, नारी शक्ति वंदन अधिनियम और अन्य पहलों का उल्लेख करते हुए इन्हें बदलते भारत की यात्रा के अध्याय बताया।
विकास और विरासत के समन्वय पर जोर
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि इन वर्षों में विकास के साथ भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को लेकर भी अनेक कार्य हुए हैं। उन्होंने अयोध्या के श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ, केदारनाथ और महाकाल जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों से जुड़े विकास कार्यों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता, संस्कृति और आत्मविश्वास को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की दिशा में भी निरंतर प्रयास हुए हैं। उनके अनुसार भारत की विकास यात्रा के साथ सांस्कृतिक चेतना का समन्वय देश के लिए महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर परमार्थ निकेतन में आयोजित विशेष यज्ञ और गंगा आरती के माध्यम से भारत की समृद्धि, शांति, प्रगति और विश्वकल्याण की कामना की गई। साथ ही 2047 तक विकसित, आत्मनिर्भर और संस्कारित भारत के संकल्प की दिशा में सामूहिक सहभागिता का आह्वान किया गया।

