‘गढ़देवा 2026-27’ का आगाज, रांसी स्टेडियम में गूंजा ‘विजयी भवः’; 15 विकासखंडों के खिलाड़ी दिखाएंगे दमखम
**जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने किया 76वीं जनपदीय शीतकालीन क्रीड़ा प्रतियोगिता का शुभारंभ, खिलाड़ियों को दिया आत्मविश्वास और खेल भावना के साथ आगे बढ़ने का संदेश**
पौड़ी। जिला मुख्यालय पौड़ी स्थित शहीद राइफलमैन महावीर चक्र जसवंत सिंह स्टेडियम रांसी बुधवार को खिलाड़ियों के उत्साह, उमंग और ‘विजयी भवः’ के उद्घोष से गूंज उठा। यहां 76वीं जनपदीय विद्यालयी शीतकालीन क्रीड़ा प्रतियोगिता ‘गढ़देवा 2026-27’ का भव्य शुभारंभ जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान उन्होंने खेल ध्वज फहराया और जनपद के सभी 15 विकासखंडों से पहुंचे खिलाड़ी दलों के मार्चपास्ट की सलामी ली। प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर रहे छात्र-छात्राओं ने खेल भावना, अनुशासन और निष्ठा के साथ खेलने की शपथ ली।

10 अक्टूबर तक मैदान में दिखेगा खिलाड़ियों का दमखम
शिक्षा विभाग के तत्वावधान में 7 से 10 अक्टूबर तक आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता में जनपद के विभिन्न विकासखंडों के छात्र-छात्राएं अपनी खेल प्रतिभा और कौशल का प्रदर्शन करेंगे। प्रतियोगिता के तहत 100, 200, 400, 800, 1500 और 5000 मीटर दौड़ के साथ क्रॉस-कंट्री तथा 4×100 मीटर रिले दौड़ आयोजित की जा रही हैं। इसके अलावा लंबी कूद, त्रिकूद, ऊंची कूद, भाला फेंक, गोला फेंक और चक्का फेंक जैसी स्पर्धाओं में भी खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।
कार्यक्रम की शुरुआत में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज पौड़ी की छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर माहौल को उत्साह और उमंग से भर दिया।
‘खेल में कोई हारता नहीं, या जीतता है या सीखता है’
खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने कहा कि बच्चों का उत्साह और उमंग प्रेरणादायी है। पढ़ाई के साथ खेलों में भागीदारी बच्चों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। खेल न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ रखते हैं, बल्कि चुनौतियों का सामना करने, दबाव को नियंत्रित करने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की क्षमता भी विकसित करते हैं।
उन्होंने कहा कि जीवन में समस्याएं और चुनौतियां आती रहती हैं। मेहनत और संघर्ष के बाद हासिल की गई सफलता व्यक्ति को वास्तविक संतुष्टि देती है। खिलाड़ियों को मैदान में संघर्ष करने के साथ खेल भावना और अनुशासन बनाए रखना चाहिए। उन्होंने प्रेरित करते हुए कहा कि खेल में कोई वास्तव में हारता नहीं है, बल्कि या तो जीतता है या कुछ नया सीखता है। प्रत्येक प्रतियोगिता खिलाड़ियों को अपनी कमियों को पहचानने और पहले से बेहतर प्रदर्शन करने का अवसर देती है।
दबाव को अवसर में बदलें, आत्मविश्वास के साथ करें प्रदर्शन
जिलाधिकारी ने कहा कि प्रतियोगिता में स्टार्टिंग लाइन पर खड़े होने के दौरान दबाव महसूस होना स्वाभाविक है, लेकिन उस दबाव को नियंत्रित कर पूरी क्षमता के साथ प्रदर्शन करना ही खिलाड़ी की असली पहचान है। यही सिद्धांत परीक्षा और जीवन की अन्य चुनौतियों में भी लागू होता है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को उचित अवसर मिलने पर वे अपनी प्रतिभा को बेहतर तरीके से सामने लाते हैं। उन्होंने सभी खिलाड़ियों से पूरे आत्मविश्वास, उत्साह और सकारात्मक सोच के साथ प्रतियोगिता में भाग लेने तथा अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का आह्वान किया। साथ ही खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए ‘विजयी भवः’ का संदेश दिया।
विकासखंडों के खिलाड़ियों के लिए की गई व्यवस्थाएं
प्रतियोगिता के सफल और व्यवस्थित आयोजन के लिए शिक्षा विभाग की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। विभिन्न विकासखंडों से पहुंचे खिलाड़ियों को प्रशिक्षकों और शिक्षकों द्वारा संबंधित स्पर्धाओं के लिए मार्गदर्शन दिया जा रहा है। प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों के अनुशासन, सुरक्षा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
शुभारंभ कार्यक्रम का संचालन जयदीप रावत एवं मनोहर चमोली ‘मनु’ ने किया। इस अवसर पर अपर निदेशक, माध्यमिक शिक्षा गढ़वाल मंडल परमेंद्र बिष्ट, मुख्य शिक्षाधिकारी अत्रेश सयाना, खंड शिक्षाधिकारी मास्टर आदर्श, जिला खेल समन्वयक योगंबर सिंह नेगी सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षक, प्रशिक्षक, खिलाड़ी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

