पौड़ी में 17 ऐतिहासिक धारा-नौलों को मिलेगा नया जीवन, संरक्षण और सौंदर्यीकरण की बनेगी कार्ययोजना
**जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने 10 दिन में सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत करने के दिए निर्देश, जल संरक्षण कार्यों का होगा भौतिक सत्यापन**
पौड़ी। पौड़ी गढ़वाल में प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन को लेकर जिला प्रशासन ने पहल तेज कर दी है। जिले में ऐतिहासिक, पौराणिक एवं सांस्कृतिक महत्व के 17 धारा-नौलों को चिह्नित किया गया है। इन जल स्रोतों के संरक्षण, पुनर्जीवन और सौंदर्यीकरण की संभावनाओं का आकलन करने के लिए जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने संबंधित अधिकारियों को 10 दिन के भीतर सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवनेशन अथॉरिटी (सारा) की जिला स्तरीय कार्यकारी समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में जिले में संचालित जल संरक्षण कार्यों की प्रगति की समीक्षा के साथ ही ऐतिहासिक धारा-नौलों के संरक्षण, प्रस्तावित कार्यों की डीपीआर और विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं के वित्तीय अभिलेखों पर चर्चा की गई।
धारा-नौलों के संरक्षण के साथ संवरेगा आसपास का क्षेत्र
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल स्रोतों के संरक्षण के साथ उनके आसपास के क्षेत्रों को भी व्यवस्थित और आकर्षक बनाने पर ध्यान दिया जाए। इससे प्राकृतिक जल स्रोतों का दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित करने के साथ ही उनका बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। उन्होंने परंदा, कोला सहित अन्य क्षेत्रों में प्रस्तावित कार्यों का तकनीकी दृष्टि से स्थलीय निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा। बैठक में ग्राम पंचायत परंदा की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के अनुमोदन पर भी चर्चा हुई।
चाल-खाल और चेकडैम के कार्यों का होगा सत्यापन
मुख्य विकास अधिकारी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में कराए गए जल संरक्षण कार्यों का भौतिक सत्यापन और स्थलीय निरीक्षण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने चाल-खाल, चेकडैम सहित अन्य कार्यों की वास्तविक प्रगति का मौके पर जाकर आकलन करने को कहा। साथ ही सभी खंड विकास अधिकारियों को संबंधित कार्यों के उपयोगिता प्रमाण पत्र समय से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि योजनाओं की प्रगति और वित्तीय स्थिति की समीक्षा की जा सके।
धारा-नौलों के लिए बनेगी कार्ययोजना, एप विकसित करने पर भी चर्चा
उप निदेशक जलागम अजय सोनकर ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर जिले में 17 ऐतिहासिक, पौराणिक एवं सांस्कृतिक महत्व के धारा-नौलों को चिह्नित किया गया है। इनके संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी। बैठक में धारा-नौलों के चिह्निकरण, नामांकन और मापन से संबंधित जानकारी एकत्र करने के लिए एप विकसित करने पर भी विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में पेयजल विभाग की ओर से जिला सारा केंद्र को पूर्व में भेजे गए प्रस्ताव में संशोधन तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 के उपयोगिता प्रमाण पत्रों से संबंधित विषयों पर भी चर्चा की गई।
इस अवसर पर जिला विकास अधिकारी रमेश चंद, अधीक्षण अभियंता जल निगम मो. मिशम, अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई धीरज सैनी, उप निदेशक जलागम अजय सोनकर, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी दीपेश काला सहित संबंधित अधिकारी, कर्मचारी और समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

