अनुमान समिति के अध्ययन दौरे पर सांसद पहुंचे परमार्थ निकेतन, गंगा आरती में हुए शामिल
ऋषिकेश। भारत की संसद की अनुमान समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यों तथा भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने पांच दिवसीय उत्तराखंड अध्ययन दौरे के तहत मंगलवार को ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन का भ्रमण किया। इस दौरान सांसदों ने परमार्थ निकेतन के पीठाधीश्वर स्वामी चिदानंद सरस्वती और डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती के सान्निध्य में गंगा आरती एवं यज्ञ में सहभाग किया।

अध्ययन दौरे में सांसद एम. के. राघवन, प्रतिमा मंडल और चंदन चौहान सहित केंद्र सरकार के अधिकारी एवं बीएचईएल के प्रतिनिधि शामिल रहे। परमार्थ निकेतन पहुंचने पर उनका भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के अनुरूप अभिनंदन किया गया।
गंगा आरती के दौरान स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि नदियां केवल जल की धाराएं नहीं हैं, बल्कि भारत की सभ्यता, संस्कृति, आस्था और जीवन का आधार हैं। उन्होंने कहा कि देश की विकास यात्रा तभी सार्थक होगी, जब विकास के साथ नदियों, पर्यावरण, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों का संरक्षण भी सुनिश्चित हो।
उन्होंने कहा कि मां गंगा भारत की जीवनधारा के साथ सांस्कृतिक चेतना की भी धारा हैं। गंगा के प्रति श्रद्धा को स्वच्छता, संरक्षण और संवर्धन के संकल्प में बदलना समय की आवश्यकता है।

इस अवसर पर डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती ने भारतीय ज्ञान परंपरा, योग, पर्यावरण चेतना, नदी संरक्षण और वैश्विक स्तर पर भारत की आध्यात्मिक विरासत की भूमिका पर विचार साझा किए। सांसदों और परमार्थ निकेतन के प्रतिनिधियों के बीच विकास और विरासत, पर्यावरण संरक्षण, नदियों का महत्व, भारतीय संस्कृति एवं संस्कार, आध्यात्मिक पर्यटन, योग और प्रकृति संरक्षण जैसे विषयों पर संवाद हुआ।
सांसदों ने परमार्थ निकेतन की आध्यात्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों के साथ योग, गंगा संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण तथा भारतीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन से जुड़े प्रयासों की जानकारी भी ली।
इस दौरान स्वामी चिदानंद सरस्वती ने सांसदों को रुद्राक्ष के पौधे भेंट कर हरित विकास और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
अनुमान समिति का अध्ययन दौरा विभिन्न संस्थानों की कार्यप्रणाली, व्यवस्थाओं और विकास से जुड़े पहलुओं के प्रत्यक्ष अध्ययन की दृष्टि से किया जा रहा है। परमार्थ निकेतन का प्रवास भारतीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक विकास के बीच संवाद का अवसर बना।
