सात तालाबों में मछली उत्पादन कर सालाना करीब तीन लाख रुपये की बचत, तीन महिलाओं को भी मिला रोजगार
पौड़ी। पाबौ विकासखंड के बिडोली गांव निवासी राजेंद्र चमोली ने मछली पालन को स्वरोजगार का जरिया बनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। पिछले पांच वर्षों से मछली उत्पादन से जुड़े राजेंद्र वर्तमान में सात तालाबों में पंगास और ग्रास कार्प का उत्पादन कर रहे हैं। उनके इस कार्य से तीन स्थानीय महिलाओं को भी रोजगार का अवसर मिला है।

राजेंद्र ने मत्स्य विभाग के सहयोग से मछली पालन की शुरुआत की थी। वर्तमान में वह वर्ष में दो से तीन बार मछली का उत्पादन करते हैं। एक उत्पादन चक्र में करीब 4 कुंतल मछली का उत्पादन हो रहा है, जिसे स्थानीय बाजार में आसानी से बेच दिया जाता है। उत्पादन बढ़ाने और मछली की प्रजातियों में विविधता लाने के लिए राजेंद्र अब तालाबों में गोल्डन फिश का बीज डालने की तैयारी कर रहे हैं।
मछली उत्पादन से प्राप्त आय में से महिलाओं को भुगतान करने के बाद राजेंद्र सालाना करीब 3 लाख रुपये की बचत कर रहे हैं। वहीं, उनके साथ काम कर रही महिलाएं भी मछली पालन के माध्यम से आय अर्जित कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।
जिला मत्स्य अधिकारी अभिषेक मिश्रा ने बताया कि राजेंद्र चमोली करीब पांच वर्षों से प्रेरणा मत्स्यजीवी सहकारी समिति से जुड़े हैं। इससे पहले वह सब्जी उत्पादन का कार्य करते थे। विभागीय सहयोग और मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत लाभ मिलने के बाद उन्होंने मछली पालन को स्वरोजगार के रूप में अपनाया।
राजेंद्र चमोली की पहल ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की दिशा में एक उदाहरण बन रही है। मछली पालन के माध्यम से जहां उन्हें स्थायी आय का साधन मिला है, वहीं अन्य ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार हुए हैं।
