एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियों पर परमार्थ निकेतन ने दी बधाई, गंगा आरती खिलाड़ियों को समर्पित
ऋषिकेश। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन और पदक उपलब्धियों पर परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश की ओर से सभी खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं। इस अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने आज की पावन गंगा आरती को एशियन गेम्स में भारत के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों और देश की युवा शक्ति को समर्पित किया।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि जब कोई भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लेकर खड़ा होता है, तो उसके साथ पूरे देश की आशा, प्रार्थना और गौरव जुड़ा होता है। उन्होंने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि स्वयं पर विजय प्राप्त करने की साधना है। एकाग्रता, अनुशासन, तप, त्याग और निरंतर अभ्यास से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।
उन्होंने शूटिंग के स्कीट मिश्रित टीम मुकाबले में परिनाज धालीवाल और अनंतजीत सिंह नरूका द्वारा कांस्य पदक जीतने पर दोनों खिलाड़ियों को बधाई दी। भारतीय जोड़ी ने फाइनल में 44 अंक हासिल कर कांस्य पदक अपने नाम किया।
इसी क्रम में नाओरेम रोशिबिना देवी ने महिला 60 किग्रा सांडा स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया। यह उनकी लगातार तीसरी एशियन गेम्स पदक उपलब्धि बताई गई। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सच्चा योद्धा वही है, जो हर परिस्थिति में अपने संकल्प को जीवित रखता है।
वहीं रोइंग के पुरुष डबल स्कल्स मुकाबले में सतनाम सिंह और सलमान खान ने कांस्य पदक जीतकर भारत को गौरवान्वित किया। इस स्पर्धा में यह भारत का पहला एशियन गेम्स पदक बताया गया। स्वामी जी ने दोनों खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि जब दो संकल्प एक दिशा और एक लक्ष्य के साथ आगे बढ़ते हैं, तो विजय का मार्ग स्वयं बनता है।
उन्होंने कहा कि भारत के खिलाड़ी आज दुनिया को यह संदेश दे रहे हैं कि देश की युवा शक्ति में सामर्थ्य, संस्कार और संकल्प मौजूद है। खेलों को चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण की साधना बताते हुए उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को शिक्षा और करियर के साथ खेल, योग, ध्यान, सेवा और संस्कारों से जोड़ने का आह्वान किया।
इस अवसर पर परमार्थ निकेतन की ओर से माँ गंगा से प्रार्थना की गई कि भारतीय खिलाड़ी स्वस्थ रहें, निरंतर नई ऊंचाइयां हासिल करें और विश्व के हर खेल मैदान में तिरंगा गौरव के साथ लहराते रहे। साथ ही खिलाड़ियों की उपलब्धियों से देश के युवाओं में स्वस्थ जीवन, अनुशासन, खेल भावना और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा जागृत होने की कामना की गई।
