उत्तराखंड

आरटीई से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी अनिवार्यता से मुक्त करने की मांग

रुड़की/हरिद्वार। आरटीई अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से मुक्त करने की मांग को लेकर उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय में गढ़वाल सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक अनिल बलूनी से मुलाकात की प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षकों की टीईटी संबंधी समस्या और इसके दूरगामी प्रभावों से सांसद को अवगत कराया।

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पौड़ी गढ़वाल के जिलाध्यक्ष मनोज जुगरान ने किया। हरिद्वार जिलाध्यक्ष अश्वनी चौहान ने बताया कि उच्चतम न्यायालय के 1 सितंबर 2025 के आदेश के क्रम में 1 अप्रैल 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता का विषय सामने आया है। उन्होंने कहा कि आदेश में 55 वर्ष से अधिक आयु के शिक्षकों को सेवा में बने रहने की राहत दी गई है, लेकिन टीईटी उत्तीर्ण नहीं करने की स्थिति में पदोन्नति से वंचित किए जाने और निर्धारित अवधि में टीईटी पास नहीं करने वाले शिक्षकों की सेवा प्रभावित होने की आशंका है।

शिक्षक प्रतिनिधियों ने कहा कि आरटीई अधिनियम 1 अप्रैल 2010 से प्रभावी हुआ था और एनसीटीई ने 23 अगस्त 2010 को संबंधित अधिसूचना जारी की। इससे पहले नियुक्त शिक्षक उस समय लागू शैक्षिक एवं नियुक्ति मानकों को पूरा करते हुए सेवा में आए थे। ऐसे में 25 से 30 वर्षों तक अध्यापन कर चुके शिक्षकों पर अब टीईटी की अनिवार्यता लागू करना व्यावहारिक और न्यायसंगत नहीं है।

उन्होंने कहा कि इस निर्णय का प्रभाव उत्तराखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर के करीब 25 लाख शिक्षकों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा है। लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था में योगदान दे रहे शिक्षकों के अनुभव और सेवाकाल को ध्यान में रखते हुए मानवीय दृष्टिकोण से समाधान निकाला जाना चाहिए।

सांसद बलूनी ने दिया समाधान का आश्वासन

सांसद अनिल बलूनी ने प्रतिनिधिमंडल की मांग को गंभीरता से सुनते हुए इसे जायज बताया। उन्होंने आश्वासन दिया कि शिक्षकों की इस समस्या को आगामी संसद सत्र में उचित स्तर पर उठाया जाएगा और केंद्र सरकार के स्तर पर समाधान के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर विषय को उनके समक्ष रखने का भी आश्वासन दिया।

इस दौरान पौड़ी गढ़वाल जिलाध्यक्ष मनोज जुगरान, हरिद्वार जिलाध्यक्ष अश्वनी चौहान, प्रांतीय तदर्थ समिति सदस्य दीपक सजवाण, जिला संयुक्त मंत्री राजेंद्र ढौडियाल तथा हरिद्वार के सुमित चौहान मौजूद रहे।

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