ऋषिकेश

श्रावण के चतुर्थ सोमवार पर परमार्थ निकेतन से समत्व का संदेश

ऋषिकेश। श्रावण के पावन चतुर्थ सोमवार के अवसर पर परमार्थ निकेतन के पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने देशवासियों को मंगलकामनाएं देते हुए भगवान शिव के समत्वमय जीवन से संतुलन, संयम, करुणा और लोकमंगल की प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

 

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि आज जीवन तेज गति से आगे बढ़ रहा है। विचारों में असहमति और बाहरी परिस्थितियों का प्रभाव बढ़ने के बीच भगवान शिव का समत्वमय स्वरूप समाज और विशेषकर युवा पीढ़ी के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि समत्व का अर्थ केवल समान व्यवहार नहीं, बल्कि सुख-दुःख और विपरीत परिस्थितियों के बीच अंतर्मन का संतुलन बनाए रखना है।

उन्होंने भगवद्गीता के संदेश “समत्वं योग उच्यते” का उल्लेख करते हुए कहा कि सुख-दुःख, लाभ-हानि, जय-पराजय और मान-अपमान जैसी परिस्थितियों में मन की संतुलित अवस्था ही योग का सार है।

उन्होंने कहा कि भगवान शिव का स्वरूप समत्व का सहज उदाहरण है। कैलास की शांति और तांडव की ऊर्जा, योगी और गृहस्थ का स्वरूप तथा मस्तक पर चंद्रमा की शीतलता और कंठ में हलाहल धारण करने की सामर्थ्य शिव के भीतर विविधताओं के अद्भुत समन्वय को दर्शाती है। जीवन में परिस्थितियां अनेक हो सकती हैं, लेकिन मन का संतुलन नहीं खोना चाहिए।

स्वामी चिदानन्द ने कहा कि समाज में विभिन्न मत, विचार, जीवनशैली और दृष्टिकोण होना स्वाभाविक है। विविधता सनातन संस्कृति की शक्ति रही है। असहमति और विचारों की भिन्नता हो सकती है, लेकिन इससे हृदयों में दूरी नहीं आनी चाहिए।

उन्होंने युवाओं से सोशल मीडिया की तुलना, सफलता के दबाव और त्वरित परिणाम की अपेक्षाओं से उत्पन्न मानसिक असंतुलन से बचने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दूसरों की सफलता देखकर ईर्ष्या के बजाय प्रेरणा लेनी चाहिए और असफलता को निराशा नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का अवसर बनाना चाहिए।

परमार्थ निकेतन की ओर से श्रावण के चतुर्थ सोमवार पर संदेश दिया गया कि सुख में अहंकार न हो, दुःख में विश्वास न टूटे, सफलता मिलने पर सेवा की भावना बढ़े और शक्ति मिलने पर विनम्रता बढ़े। भगवान शिव का संदेश है कि बाहरी परिस्थितियां बदलती रहें, लेकिन भीतर का दीपक स्थिर रहना चाहिए।

इस अवसर पर सभी से संकल्प लेने का आह्वान किया गया कि जीवन में समत्व, हृदय में करुणा, वाणी में मधुरता, कर्मों में सेवा और लोकमंगल की भावना को स्थान दिया जाए। महादेव की कृपा से समाज में समरसता तथा राष्ट्र में सुख, शांति और समृद्धि का विस्तार हो।

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