उत्तराखंड आंदोलनकारी एवं गोसेवक सोहनलाल सेमवाल का निधन, क्षेत्र में शोक
द्वारीखाल। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, समाजसेवी एवं गोदांबरी गो सेवा धाम के प्रबंधक ग्राम बागों निवासी सोहनलाल सेमवाल का शुक्रवार शाम करीब चार बजे लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन की खबर से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों के अनुसार शनिवार को पैतृक घाट व्यासचट्टी में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

उनके पुत्र आशीष सेमवाल ने बताया कि सोहनलाल सेमवाल अपने पीछे तीन पुत्रों, पुत्रवधुओं, बेटी-दामाद समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी गोदांबरी देवी का पहले ही निधन हो चुका है। गोसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए गोदांबरी देवी को मरणोपरांत अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला आयोग की ओर से सम्मानित किया गया था।
सोहनलाल सेमवाल का जीवन संघर्षों से भरा रहा। उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मिलकर विषम परिस्थितियों में निराश्रित गोवंश की सेवा का कार्य जारी रखा। गर्मियों में जंगलों में आग लगने के दौरान वह गोशाला के गोवंश को करीब दो माह तक हथनूड़ कोठार स्थित शिवालय में सुरक्षित रखते थे।
उत्तराखंड राज्य आंदोलन में भी सोहनलाल सेमवाल की सक्रिय भूमिका रही। वह द्वारीखाल ब्लॉक में युवा संघर्ष समिति के अध्यक्ष रहे। उनके नेतृत्व में गांव-गांव और घर-घर तक राज्य आंदोलन की अलख जगाने का कार्य हुआ। सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहने के साथ वह अच्छे गायक और स्टेज कलाकार भी थे।
भगवान श्रीराम के परम भक्त सोहनलाल सेमवाल रामलीला मंचन में भी विशेष रुचि रखते थे। उत्तिण्डा, बागों सहित आसपास के गांवों में आयोजित रामलीला मंचन में वह सक्रिय रूप से सहयोग करते थे। सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी के चलते क्षेत्र में उनकी अलग पहचान थी।
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि सोहनलाल सेमवाल के निधन से सामाजिक, सांस्कृतिक और गोसेवा के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है। उनके संघर्ष और सामाजिक योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।
