चंद्रशेखर आजाद व लोकमान्य तिलक की जयंती पर परमार्थ निकेतन ने दी श्रद्धांजलि, युवाओं को राष्ट्रसेवा का संदेश
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में गुरुवार को महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद और महान समाज सुधारक एवं स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर आयोजित गंगा आरती दोनों राष्ट्रनायकों के राष्ट्रप्रेम और बलिदान को समर्पित रही।

परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद का जीवन राष्ट्रप्रेम, त्याग, आत्मसम्मान और अदम्य साहस का प्रतीक है। उनका प्रसिद्ध उद्घोष “दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे, आजाद ही रहे हैं, आजाद ही रहेंगे” आज भी युवाओं में राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान का संचार करता है।
उन्होंने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा” का उनका अमर संदेश स्वतंत्रता आंदोलन का प्रेरणास्रोत बना। तिलक ने शिक्षा, समाज जागरण, संस्कृति संरक्षण और राष्ट्र निर्माण में अतुलनीय योगदान दिया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि स्वतंत्रता केवल अधिकार नहीं, बल्कि उसे अपने चरित्र, अनुशासन, कर्तव्य और राष्ट्रसेवा से सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को अपनी ऊर्जा राष्ट्र निर्माण, समाज उत्थान, पर्यावरण संरक्षण, सेवा और मानवता के कल्याण में लगानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रप्रेम केवल भावनाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि हमारे व्यवहार, कार्यों और संकल्पों में भी दिखाई देना चाहिए। समाज में शांति, सद्भाव, करुणा और एकता को मजबूत करना भी सच्ची राष्ट्रसेवा है।
परमार्थ निकेतन की ओर से सभी नागरिकों से आह्वान किया गया कि वे चंद्रशेखर आजाद और लोकमान्य तिलक के साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाते हुए भारत को सेवा, संस्कार और सद्भाव के मार्ग पर आगे बढ़ाने का संकल्प लें।
