आदिवासी छात्रों की शिक्षा के लिए श्रीमती मंजिरा देवी विश्वविद्यालय का अहम कदम
त्रिपुरा सरकार की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत बीएड और डीएलएड संस्थानों के लिए हुआ एम्पैनल
उत्तरकाशी। आदिवासी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षक शिक्षा से जोड़ने और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में श्रीमती मंजिरा देवी विश्वविद्यालय, उत्तरकाशी को त्रिपुरा सरकार की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना (एसटी विद्यार्थियों) के अंतर्गत बीएड एवं डीएलएड संस्थानों के लिए एम्पैनल किया गया है। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इसे आदिवासी विद्यार्थियों के शैक्षिक सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. भगवान नौटियाल ने कहा कि विश्वविद्यालय का मूल मंत्र “पूरा भारत एक परिवार है” है। इसी भावना के अनुरूप संस्थान शिक्षा को सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि आर्थिक स्थिति किसी भी विद्यार्थी की शिक्षा में बाधा नहीं बननी चाहिए। विश्वविद्यालय की नीतियां समाज के प्रत्येक वर्ग तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षक शिक्षा पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गई हैं।
त्रिपुरा के आदिवासी कल्याण मंत्री विकाश देबबर्मा के अनुसार, त्रिपुरा देश का पहला राज्य है जिसने निजी बीएड एवं डीएलएड संस्थानों को भी इस छात्रवृत्ति योजना के दायरे में शामिल किया है। उन्होंने इसे पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक विद्यार्थियों की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार बताया।
आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 की तैयारियों को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक में आदिवासी कल्याण विभाग के अधिकारियों और एम्पैनल संस्थानों के प्रतिनिधियों ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में संस्थागत जिम्मेदारियों, निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुपालन तथा छात्रहित में छात्रवृत्ति योजना के सुचारु संचालन पर विशेष जोर दिया गया।
विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि यह पहल आदिवासी युवाओं को शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाने के साथ-साथ उनके कौशल विकास और मानव संसाधन निर्माण को नई गति देगी। कुलपति डॉ. भगवान नौटियाल ने कहा कि संस्थान इसे अपनी सामाजिक जिम्मेदारी मानते हुए आदिवासी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए पूर्ण निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करेगा। उन्होंने दोहराया कि विश्वविद्यालय का संकल्प शिक्षा को सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण बनाकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।
