स्वास्थ्य कारणों से छूटी ड्राइविंग तो सुशील ने संभाली स्वरोजगार की राह, टोफू निर्माण से पाई नई पहचान
पौड़ी। संकट को अवसर में बदलने की मिसाल पेश की है कोटद्वार के मानपुर निवासी सुशील कुमार भट्ट ने। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण ड्राइविंग छोड़ने पर मजबूर हुए सुशील ने हिम्मत हारने के बजाय खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में कदम रखा और आज वे टोफू (सोया और मूंगफली का पनीर) निर्माण से न केवल अच्छी कमाई कर रहे हैं, बल्कि अन्य युवाओं को भी रोजगार दे रहे हैं।

सरकारी योजना और बैंक ऋण का मिला सम्बल
ड्राइविंग का काम छूटने के बाद सुशील नए विकल्प तलाश रहे थे। जिला सहकारी बैंक से 5 लाख रुपये का ऋण और ‘प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना’ (PMFME) के तहत मिली 35 प्रतिशत सब्सिडी के सहयोग से उन्होंने करीब एक साल पहले मानपुर में टोफू निर्माण इकाई स्थापित की। शुरुआती चुनौतियों के बावजूद आधुनिक मशीनों और बेहतर गुणवत्ता के दम पर उनकी इकाई अब पटरी पर आ चुकी है। वर्तमान में सुशील टोफू बिक्री से प्रतिमाह 15 से 20 हजार रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रहे हैं।
विदेश से लौटे युवक को घर के पास मिला रोजगार
सुशील की इस पहल से दुबई के होटल में काम कर चुके गौरव बड़थ्वाल को भी स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला है। कोरोना काल के बाद विदेश न जा पाने वाले गौरव अब इसी इकाई से जुड़कर काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि स्वास्थ्यवर्धक और प्रोटीनयुक्त उत्पाद होने के कारण बाजार में टोफू की मांग तेजी से बढ़ रही है।
लघु खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा
उद्योग विभाग के अधिकारियों के अनुसार PMFME योजना का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को वित्तीय सहायता और सब्सिडी देकर प्रोत्साहित करना है। इस योजना के माध्यम से अरसा, रोट, पापड़, चिप्स, गन्ने का रस और बेकरी जैसे स्थानीय खाद्य उत्पादों से जुड़ी इकाइयां आसानी से स्थापित की जा सकती हैं।
