राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस पर परमार्थ निकेतन में लहराया तिरंगा
स्वामी चिदानन्द सरस्वती बोले— तिरंगा भारत की आत्मा, स्वाभिमान और एकता का जीवंत प्रतीक
ऋषिकेश। राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस के अवसर पर बुधवार को परमार्थ निकेतन में तिरंगा फहराकर राष्ट्र की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों का संदेश दिया गया। इस अवसर पर परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भारतीय तिरंगा केवल तीन रंगों का ध्वज नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आकांक्षाओं, बलिदानों, संघर्षों, संस्कारों और संकल्पों का जीवंत प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा द्वारा तिरंगे को स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया गया था। यह ऐतिहासिक निर्णय देश की राष्ट्रीय अस्मिता, स्वाधीनता और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है। राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस हमें तिरंगे के गौरव और उसके प्रति अपने कर्तव्यों का स्मरण कराता है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि तिरंगे का केसरिया रंग त्याग, साहस, पराक्रम और निःस्वार्थ सेवा का संदेश देता है। श्वेत रंग सत्य, शांति, पवित्रता और सामाजिक समरसता का प्रतीक है, जबकि हरा रंग समृद्धि, कृषि, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की भावना को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि तिरंगे के मध्य स्थित अशोक चक्र निरंतर गतिशीलता, धर्म, न्याय, कर्तव्य और प्रगति का प्रतीक है। इसकी 24 तीलियां हमें निरंतर कर्म करते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा देती हैं।
स्वामी जी ने कहा कि आज भारत वैश्विक मंच पर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। अंतरिक्ष, खेल, विज्ञान, संस्कृति और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लहराता तिरंगा देश के आत्मविश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों और विश्व बंधुत्व का प्रतीक बन चुका है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस केवल एक ऐतिहासिक तिथि नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को पुनः स्मरण करने का अवसर है। उन्होंने सभी नागरिकों से तिरंगे के आदर्शों—साहस, सत्य, शांति, सेवा, समर्पण, एकता, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रप्रेम—को अपने जीवन में अपनाने तथा भारत की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए सदैव समर्पित रहने का आह्वान किया।
