श्री जगन्नाथ रथयात्रा मानवता, समरसता और ईश्वर-भक्ति का महापर्व : स्वामी चिदानन्द सरस्वती
प्रयागराज। विश्वविख्यात श्री जगन्नाथ रथयात्रा के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष एवं परमार्थ पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह महापर्व ईश्वर-भक्ति, सेवा, समरसता और मानवता का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भगवान स्वयं अपने भक्तों के द्वार आते हैं, जो सनातन संस्कृति की करुणा और समावेशी भावना का प्रतीक है।

परमार्थ त्रिवेणी पुष्प स्थित श्री जगन्नाथ धाम में इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना की गई। स्वामी जी ने कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ अपने अग्रज भगवान बलभद्र, भगिनी सुभद्रा और चक्रराज सुदर्शन के साथ रथ पर आरूढ़ होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर तक यात्रा करते हैं। यह यात्रा ईश्वर और भक्त के दिव्य मिलन, लोकमंगल और सामाजिक समरसता का संदेश देती है।
उन्होंने बताया कि प्रयागराज स्थित परमार्थ त्रिवेणी पुष्प में स्थापित श्री जगन्नाथ धाम उत्तर और पूर्व भारत की सांस्कृतिक एकता का महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है। यह धाम भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता, सेवा और राष्ट्रीय एकता को नई दिशा देने का कार्य करेगा।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भगवान जगन्नाथ किसी एक जाति, भाषा या समुदाय के नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के आराध्य हैं। उनके विशाल नेत्र पूरी सृष्टि पर समान करुणा की दृष्टि रखते हैं और हमें प्रेम, समानता तथा सेवा का संदेश देते हैं।
उन्होंने कहा कि रथ की रस्सी खींचना केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अपने जीवन को अहंकार, स्वार्थ और अज्ञान से मुक्त कर धर्म, सेवा और मानव कल्याण की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रतीक है। जब लाखों श्रद्धालु बिना किसी भेदभाव के एक ही रस्सी को खींचते हैं, तब “वसुधैव कुटुम्बकम्” का संदेश साकार होता है।
स्वामी जी ने वर्तमान समय की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब विश्व हिंसा, पर्यावरण संकट और सामाजिक विभाजन जैसी समस्याओं का सामना कर रहा है, तब श्री जगन्नाथ रथयात्रा सेवा, करुणा, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सद्भाव और लोकमंगल का मार्ग दिखाती है।
उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से भगवान श्री जगन्नाथ के प्रेम, करुणा और समरसता के संदेश को जीवन में अपनाने तथा प्रकृति संरक्षण, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्र निर्माण के लिए संकल्पित होने का आह्वान किया।
