हरेला पर हरियाली का संदेश, उधर सात मोड़ पर पेड़ों की कटाई से उठे सवाल
‘एक ओर पौधरोपण के उत्सव, दूसरी ओर हजारों पेड़ों पर चल रही आरी’
ऋषिकेश/देहरादून। आज पूरे उत्तराखंड में लोकपर्व हरेला उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। राज्य सरकार और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा व्यापक स्तर पर पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। “पेड़ लगाओ, पर्यावरण बचाओ” का संदेश देते हुए लाखों पौधे रोपे जाएंगे और लोगों से पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की जाएगी।

लेकिन इसी बीच देहरादून-ऋषिकेश मोटरमार्ग के सात मोड़ क्षेत्र में हजारों पेड़ों की कटाई ने पर्यावरण संरक्षण के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों के विरोध के बावजूद पुलिस बल की मौजूदगी में पेड़ों की कटाई जारी रहने की चर्चा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन पेड़ों के कटने से केवल हरियाली ही नहीं, बल्कि पक्षियों के घोंसले, जंगली जानवरों का प्राकृतिक आवास और असंख्य जीव-जंतुओं का जीवन भी प्रभावित हो रहा है। उनका आरोप है कि विकास कार्यों के नाम पर पर्यावरण संतुलन की अनदेखी की जा रही है।
पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि एक ओर सरकार हरेला के अवसर पर पौधरोपण का संदेश देती है, तो दूसरी ओर परिपक्व पेड़ों की बड़े पैमाने पर कटाई से यह संदेश कमजोर पड़ता है। उनका मानना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
अब सवाल यह है कि क्या केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त है, या वर्षों पुराने वृक्षों को बचाना भी उतना ही जरूरी है? हरेला जैसे प्रकृति पर्व पर यह बहस एक बार फिर तेज हो गई है।
