डिजिटल हाजिरी से परेशान ग्रामीण मजदूर, फेस मैचिंग और नेटवर्क बना बड़ी चुनौती
उत्तराखंड। उत्तराखंड में बीवी जी राम जी योजना के तहत कार्यरत ग्रामीण मजदूर नई डिजिटल हाजिरी व्यवस्था से परेशान हैं। फेस और आंखों की पुतली के सत्यापन के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया कई क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
मजदूरों का कहना है कि कई बार उनका चेहरा सिस्टम से मैच नहीं करता। हाजिरी दर्ज कराने के लिए उन्हें बार-बार कैमरे के सामने खड़ा होना पड़ता है। कई लोग मुंह धोकर या अलग-अलग एंगल से फोटो खिंचवाकर प्रयास करते हैं, लेकिन इसके बावजूद हाजिरी दर्ज नहीं हो पाती। इससे उनका काफी समय बर्बाद होता है और कई बार उन्हें बिना हाजिरी लगाए ही घर लौटना पड़ता है।

समस्या केवल फेस ऑथेंटिकेशन तक सीमित नहीं है। उत्तराखंड के पर्वतीय और दूरस्थ गांवों में आज भी मोबाइल नेटवर्क की समस्या बनी हुई है। कई कार्यस्थलों पर इंटरनेट उपलब्ध नहीं होने के कारण ऑनलाइन हाजिरी दर्ज करना मुश्किल हो जाता है, जिसका सीधा असर श्रमिकों की दैनिक मजदूरी पर पड़ रहा है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कई सरकारी कार्यालयों और विद्यालयों में आज तक डिजिटल उपस्थिति व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है। कहीं मशीनें खराब बताई जाती हैं तो कहीं अन्य कारणों से वैकल्पिक व्यवस्था अपनाई जाती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब अन्य सरकारी संस्थानों में तकनीकी खराबी होने पर विकल्प उपलब्ध हैं, तो ग्रामीण मजदूरों के लिए भी ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं होनी चाहिए।

ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि फेस ऑथेंटिकेशन के साथ-साथ हाजिरी दर्ज करने का एक सरल और व्यावहारिक वैकल्पिक माध्यम भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि नेटवर्क या तकनीकी समस्या के कारण किसी भी श्रमिक की मजदूरी प्रभावित न हो।
तकनीक का उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है, लेकिन यदि तकनीकी खामियों के कारण श्रमिकों का समय, श्रम और आजीविका प्रभावित हो रही है, तो व्यवस्था की समीक्षा और आवश्यक सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है।
