राष्ट्रीय

कांची कामकोटि पीठम् में संतों का दिव्य संगम, उत्तर-दक्षिण की आध्यात्मिक एकता का दिया संदेश

नई दिल्ली/कांची, 5 जुलाई। श्री कांची कामकोटि पीठम् में आयोजित चतुर्थ कुम्भाभिषेकम् एवं 69वें जगद्गुरु शंकराचार्य पूज्य श्री जयेन्द्र सरस्वती महास्वामी जी के अवित्तम् (धनिष्ठा) जन्म नक्षत्र महोत्सव में परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने सहभागिता की। इस अवसर पर उनकी पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य श्री विजयेंद्र सरस्वती जी महाराज से आत्मीय भेंट हुई।

कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चार, यज्ञ, महाअभिषेक और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के बीच सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया गया। दोनों संतों ने भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा, पर्यावरण संरक्षण, सेवा और संस्कारयुक्त शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने जगद्गुरु शंकराचार्य श्री विजयेंद्र सरस्वती जी महाराज को परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश आने का आमंत्रण देते हुए कहा कि हिमालय और दक्षिण भारत की ज्ञान परंपराओं का यह समन्वय पूरे देश के लिए प्रेरणादायी है।

संतों ने युवाओं में भारतीय संस्कृति, राष्ट्रप्रेम, सेवा, करुणा और नैतिक मूल्यों के संस्कार विकसित करने पर बल देते हुए कहा कि भारत की विविध परंपराओं में निहित एकता ही उसकी सबसे बड़ी सांस्कृतिक शक्ति है। कार्यक्रम में देशभर से आए श्रद्धालुओं, संत-महात्माओं और भक्तों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *