ऋषिकेश

विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती का संदेश

सुरक्षित, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन हर व्यक्ति का अधिकार, भूखमुक्त विश्व मानवता का कर्तव्य

ऋषिकेश। विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने मानवता से आह्वान किया कि भोजन को केवल उपभोग की वस्तु नहीं, बल्कि ईश्वर का प्रसाद और जीवन का आधार मानकर उसका सम्मान करें। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना, सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय गरिमा से भी जुड़ा हुआ विषय है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में अन्न को ब्रह्म का स्वरूप माना गया है। “अन्नं ब्रह्म” का संदेश केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन दर्शन है। भोजन हमारी शारीरिक ऊर्जा के साथ-साथ विचारों, संस्कारों और चेतना को भी प्रभावित करता है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षित, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन उपलब्ध होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि एक ओर विश्व में प्रतिवर्ष लाखों टन भोजन बर्बाद हो जाता है, वहीं दूसरी ओर करोड़ों लोग भूख और कुपोषण से जूझ रहे हैं। यह केवल आर्थिक असमानता नहीं, बल्कि सामूहिक संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का प्रश्न भी है। यदि हमारे आसपास कोई व्यक्ति भूखा सोता है, तो हमारी समृद्धि अधूरी है।

स्वामी जी ने कहा कि दूषित और असुरक्षित भोजन अनेक बीमारियों को जन्म देता है और समाज की उत्पादकता को भी प्रभावित करता है। खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार, उद्योग, किसान, उपभोक्ता और नागरिक समाज सभी को मिलकर कार्य करना होगा।

उन्होंने भोजन की बर्बादी रोकने, स्थानीय एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने तथा जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचाने के लिए सामूहिक प्रयासों पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भोजन को फेंकने की संस्कृति के स्थान पर साझा करने की संस्कृति विकसित करनी होगी।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि खाद्य सुरक्षा का पर्यावरण संरक्षण से भी सीधा संबंध है। भूमि, जल, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के बिना भविष्य की पीढ़ियों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। टिकाऊ कृषि, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग समय की आवश्यकता है।

युवाओं का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि वे भोजन के प्रति कृतज्ञता का भाव विकसित करें, उसकी बर्बादी रोकें और जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि अन्न केवल भोजन नहीं, बल्कि ईश्वर का वरदान है। इसका सम्मान करें और ऐसा समाज बनाने में योगदान दें, जहां कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए तथा प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानपूर्वक सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध हो।

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