अंतर्राष्ट्रीय

राजदूत सम्मेलन में गूंजी आध्यात्मिक कूटनीति की आवाज, साध्वी भगवती सरस्वती ने दिया वैश्विक शांति का संदेश

जयपुर। राजस्थान के ऐतिहासिक सिक्स सेंसिस फोर्ट बरवाड़ा में आयोजित आरएआई फाउंडेशन एम्बेसडर्स कॉन्फ्रेंस एवं वार्षिक पुरस्कार समारोह 2026 में विश्व के 34 देशों के राजदूतों, उच्चायुक्तों, राजनयिकों और नीति-निर्माताओं ने सहभागिता कर वैश्विक सहयोग, सांस्कृतिक संवाद और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया।

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग, विश्व शांति, सतत विकास और राष्ट्रों के बीच सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देना रहा। विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने साझा चुनौतियों और वैश्विक साझेदारी को लेकर अपने विचार रखे।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण परमार्थ निकेतन की आध्यात्मिक गुरु साध्वी भगवती सरस्वती का प्रेरक संबोधन रहा। उन्होंने “आध्यात्मिक कूटनीति” विषय पर बोलते हुए कहा कि आज दुनिया को ऐसी कूटनीति की आवश्यकता है जो करुणा, सह-अस्तित्व, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित हो। उन्होंने भारतीय दर्शन के “वसुधैव कुटुम्बकम्” को वैश्विक शांति और सहयोग का आधार बताया।

सम्मेलन के दौरान साध्वी भगवती सरस्वती की वैटिकन दूतावास के उप प्रमुख एवं अपोस्टोलिक नुनसियो के प्रतिनिधि के साथ विशेष भेंट भी हुई। बैठक में अंतरधार्मिक सद्भाव, पर्यावरण संरक्षण, वैश्विक शांति और मानवता के हित में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की गई।

इस अवसर पर साध्वी भगवती सरस्वती ने परमार्थ निकेतन की ओर से रुद्राक्ष का पौधा और रुद्राक्ष की माला भेंट कर अतिथियों को ऋषिकेश स्थित गंगा आरती में शामिल होने का आमंत्रण दिया।

सम्मेलन में उरुग्वे, अर्जेंटीना, स्पेन, जर्मनी, कनाडा, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, थाईलैंड, ऑस्ट्रिया, मेक्सिको, चिली, क्यूबा, पुर्तगाल, सेशेल्स, तंजानिया और वैटिकन सहित 34 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

समापन अवसर पर आरएआई फाउंडेशन के वार्षिक पुरस्कार भी प्रदान किए गए, जिनमें नेतृत्व, नवाचार, सामाजिक सेवा, सांस्कृतिक संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों एवं संस्थाओं को सम्मानित किया गया।

आयोजकों ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ऐसे मंच संवाद, सहयोग और साझा मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सम्मेलन का समापन विश्व शांति, वैश्विक सद्भाव और मानव कल्याण के संकल्प के साथ हुआ।

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