उत्तराखंड

समर कैम्प में गूंजी कौरवी बोली की मिठास, बच्चों ने सुने फायकू और आयकू के स्वर

लोकभाषा, साहित्य और संस्कृति से रूबरू हुए नन्हे विद्यार्थी

कलियर/रुड़की। राजकीय प्राथमिक विद्यालय बेडपुर, रुड़की में आयोजित समर कैम्प के दूसरे दिन साहित्य, भाषा और लोकसंस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह के समूह संपादक एवं दिव्य गंगा सेवा मिशन के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. शिवेश्वर दत्त पाण्डेय ने बच्चों को कौरवी बोली की विशेषताओं और उसकी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया।

अपने संबोधन में डॉ. पाण्डेय ने कहा कि मातृभाषा और लोकबोलियां हमारी सांस्कृतिक पहचान की आधारशिला हैं। उन्होंने बताया कि कौरवी बोली केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि लोकजीवन की आत्मा है, जिसमें गांव की मिट्टी की सुगंध, रिश्तों की आत्मीयता और लोकसंस्कारों की गरिमा समाहित है। बच्चों ने उत्साहपूर्वक कौरवी शब्दों और लोक अभिव्यक्तियों को सुना तथा उन्हें दोहराकर आनंद व्यक्त किया।

इस दौरान डॉ. पाण्डेय ने हिन्दी साहित्य की नवीन विधाओं फायकू और आयकू के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि समय के साथ साहित्य में नए प्रयोग अभिव्यक्ति को और अधिक समृद्ध बना रहे हैं। उन्होंने बच्चों को सरल एवं रोचक शैली में कई फायकू सुनाए, जिससे बच्चों में साहित्य के प्रति जिज्ञासा और रचनात्मकता का विकास हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाध्यापक मुफ्ती इकराम ने की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों को अपनी भाषा, संस्कृति और साहित्य से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं तथा उनके व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम का संचालन सहायक अध्यापक डॉ. संजय वत्स ने किया। इस अवसर पर सहायक अध्यापक श्रीमती सुमन और नीतिन कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए बच्चों को भाषा और साहित्य के प्रति रुचि विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

समर कैम्प का यह दिन बच्चों के लिए केवल एक शैक्षिक गतिविधि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोकभाषा, साहित्य और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ने का प्रेरणादायी अवसर बन गया। विद्यालय परिसर देर तक साहित्यिक संवादों और बच्चों की उत्साहित मुस्कानों से जीवंत बना रहा।

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