भैरवगढ़ी मंदिर: आस्था, इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम
द्वारीखाल/पौड़ी गढ़वाल। जनपद पौड़ी गढ़वाल के कीर्तिखाल गांव की सुरम्य पहाड़ियों में, लैंसडाउन के निकट स्थित भैरवगढ़ी मंदिर धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। समुद्र तल से लगभग 2400 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं और पर्यटकों को समान रूप से आकर्षित करता है।

मंदिर तक पहुंचने के लिए कीर्तिखाल से लगभग 2 से 2.5 किलोमीटर का ट्रैक करना पड़ता है, जो घने जंगलों और मनमोहक पहाड़ी दृश्यों से होकर गुजरता है। ट्रैक के दौरान 360 डिग्री में पर्वत श्रृंखलाओं और घाटियों का विहंगम दृश्य देखने को मिलता है, जो इस स्थल को और भी खास बनाता है।
यह मंदिर भगवान शिव के 14वें अवतार काल भैरव को समर्पित है, जिन्हें गढ़वाल क्षेत्र का रक्षक और द्वारपाल माना जाता है। यहां काल नाथ भैरव देवता की नियमित पूजा-अर्चना की जाती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार देवता को काले रंग की वस्तुएं प्रिय होती हैं, इसलिए प्रसाद के रूप में मंडुवा (बाजरे का आटा) विशेष महत्व रखता है।
ऐतिहासिक दृष्टि से भी भैरवगढ़ी का विशेष महत्व है। इसे गढ़वाल के प्राचीन 52 गढ़ों में शामिल किया जाता है और पूर्व में यह स्थल लंगूर गढ़ के नाम से जाना जाता था।
प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति के संगम के कारण यह स्थान खासकर मानसून के दौरान और अधिक आकर्षक हो जाता है, जब यहां से हिमालय की चोटियों और हरियाली से भरपूर घाटियों का मनोहारी दृश्य दिखाई देता है।
