सम्मानित किसान की प्रशासन से बड़ी मांग
प्रशासन से मधुमक्खियां उपलब्ध कराने और फसलों की सुरक्षा की मांग
द्वारीखाल/पौड़ी गढ़वाल। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में जहां एक ओर पलायन और जंगली जानवरों के आतंक के कारण खेत बंजर होते जा रहे हैं, वहीं ग्राम च्वरा (चैलूसैंण के निकट) निवासी उन्नत किसान महावीर सिंह रावत विपरीत परिस्थितियों में भी खेती कर नई मिसाल पेश कर रहे हैं।

महावीर सिंह रावत अपनी पत्नी के साथ मिलकर खेती-बागवानी, मधुमक्खी पालन एवं पशुपालन कर रहे हैं। वे साग-सब्जी, मशरूम, फल, कोदा, चौलाई सहित कई फसलों की खेती करते हैं। उनके खेतों और घर के आसपास सालभर विभिन्न प्रकार के फूल खिले रहते हैं, जो उनकी मेहनत और प्रकृति के प्रति लगाव को दर्शाते हैं।
वे बदरी एवं साहीवाल नस्ल की गायों के साथ बकरी पालन भी करते हैं। उनके खेतों में उगने वाला पहाड़ी केला खेतों से ही हाथों-हाथ बिक जाता है। खास बात यह है कि वे पूरी तरह जैविक खेती करते हैं और रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग नहीं करते। उन्होंने पक्षियों के संरक्षण के लिए अपने घर में स्वयं निर्मित घोंसले भी लगाए हैं।
कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें ब्लॉक एवं जिला स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2025 में आयोजित माल्टा महोत्सव में उन्होंने जनपद पौड़ी का प्रतिनिधित्व भी किया।
वर्ष 2020 में उन्होंने गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय से मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
महावीर सिंह रावत का कहना है कि उन्होंने विभाग से मधुमक्खी पालन के लिए 10 बॉक्स खरीदे, लेकिन कई बार अनुरोध करने के बावजूद उन्हें मधुमक्खियां उपलब्ध नहीं कराई गईं। वर्तमान में वे अपने प्रयासों से एक बॉक्स में ही मधुमक्खी पालन कर रहे हैं।
उनका मानना है कि मधुमक्खी पालन से जहां शहद उत्पादन होता है, वहीं फसलों की पैदावार भी बेहतर होती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें मधुमक्खियां उपलब्ध कराई जाएं तथा जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, जिससे वे अपनी उत्पादन क्षमता को और बढ़ा सकें।
विपरीत परिस्थितियों के बावजूद महावीर सिंह रावत निरंतर खेती कर रहे हैं और इसी के माध्यम से अपनी आजीविका चला रहे हैं, जो अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है।
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