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नई दिल्ली में तृतीय ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ मेडिटेशन लीडर्स का भव्य आयोजन, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन रहे मुख्य अतिथि

नईदिल्ली। नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम के ऑडिटोरियम-1 में आयोजित दो दिवसीय तृतीय ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ मेडिटेशन लीडर्स का विशेष सत्र अत्यंत गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ।

 

इस पावन अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती (अध्यक्ष, परमार्थ निकेतन) का सान्निध्य, आशीर्वाद एवं प्रेरणादायी उद्बोधन प्राप्त हुआ। वहीं पूर्व निदेशक, सीबीआई एवं सीआरपीएफ, पद्मश्री डी.आर. कार्तिकेयन ने स्वागत भाषण देते हुए ध्यान को वैश्विक शांति का आधार बताया।

कार्यक्रम में श्री श्री रविशंकर, सद्गुरु जग्गी वासुदेव तथा ब्रह्मर्षि पत्रीजी के प्रेरणादायी वीडियो संदेश भी प्रसारित किए गए।

उपराष्ट्रपति का संदेश: मेडिटेशन से ही बेहतर विश्व संभव

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि संघर्ष केवल देशों के बीच ही नहीं, बल्कि व्यक्ति और परिवार के भीतर भी चलता है। ऐसे में आत्मचिंतन और मेडिटेशन आंतरिक शांति एवं आत्मज्ञान का मार्ग प्रदान करते हैं।

उन्होंने कहा कि:

मेडिटेशन से मन की क्षमता और स्पष्टता बढ़ती है

यह जीवन में संतुलन और सकारात्मक दृष्टिकोण लाता है

“अमृत काल” में मेडिटेशन का महत्व और अधिक बढ़ गया है

बेहतर विश्व के लिए बेहतर मानसिकता आवश्यक है

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का संदेश

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि आज दुनिया को केवल “CEO” नहीं, बल्कि “Peace CEO” की आवश्यकता है। उन्होंने “योगः कर्मसु कौशलम्” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कौशल मेडिटेशन से ही प्राप्त होता है।

उन्होंने मेडिटेशन के तीन प्रमुख लाभ बताए:

टाइम मैनेजमेंट

थॉट मैनेजमेंट

टंग मैनेजमेंट

अन्य वक्ताओं के विचार

डॉ. चंद्र पुलामारासेट्टी ने मेडिटेशन को पॉजिटिव सोच का माध्यम बताया

डॉ. लक्ष्मी कोंडावेती ने कहा कि विश्व की समस्याओं का समाधान मेडिटेशन में निहित है

विजयभास्कर रेड्डी ने इसे जीवन का विज्ञान बताया

सम्मेलन में “Mastering the Mind”, “Mastering Energy and Emotions”, “Mastering Creation” एवं “Understanding the Self” पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।

विभिन्न सत्रों में गहन चर्चा

सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने इन विषयों पर विचार रखे:

विश्व शांति और अहिंसा में ध्यान की भूमिका

हृदय स्वास्थ्य और समग्र कल्याण में मेडिटेशन

नेतृत्व क्षमता और भावनात्मक संतुलन

केस स्टडी और पैनल चर्चाओं में यह स्पष्ट हुआ कि ध्यान समाज के हर वर्ग में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखता है।

समापन

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। आयोजकों ने भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से विश्व में शांति, सद्भाव और जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

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