असंतुलित जीवनशैली से जन्म लेता है कैंसर, प्रकृति ही सबसे बड़ी चिकित्सक
ऋषिकेश। विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने मानव जीवन, स्वास्थ्य और प्रकृति के गहरे संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कैंसर केवल एक शारीरिक बीमारी नहीं, बल्कि हमारी असंतुलित और कृत्रिम जीवनशैली का भयावह परिणाम है। यदि हम अपनी प्राचीन ऋषि परंपरा की ओर लौटें और प्राकृतिक जीवनशैली को अपनाएँ, तो अनेक गंभीर बीमारियों से स्वतः ही बचाव संभव है।

स्वामी जी ने कहा कि मानव शरीर प्रकृति का ही एक अभिन्न अंग है। जब मनुष्य प्रकृति से दूर होकर रसायनों, कृत्रिमता और अस्वाभाविक दिनचर्या को अपनाता है, तब बीमारियाँ जीवन में प्रवेश करती हैं। लेकिन जब धरती, जल, वायु, अग्नि और आकाश—इन पंचतत्वों के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जिया जाता है, तो शरीर में रोगों से लड़ने की स्वाभाविक शक्ति विकसित हो जाती है।
उन्होंने वर्तमान भागदौड़ भरी जीवनशैली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि तनाव, अनियमित दिनचर्या, जंक फूड, पैक्ड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के प्रमुख कारण बनते जा रहे हैं। इन खाद्य पदार्थों में मौजूद रसायन, प्रिज़र्वेटिव्स और कृत्रिम तत्व धीरे-धीरे शरीर में विष के रूप में जमा होकर रोगों को जन्म देते हैं।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने प्राकृतिक और सात्त्विक आहार को सर्वोत्तम औषधि बताते हुए कहा कि ताजा, जैविक और घर का बना भोजन ही वास्तविक पोषण प्रदान करता है। हरी सब्जियाँ, मौसमी फल, साबुत अनाज, अंकुरित आहार और शुद्ध जल को दैनिक जीवन में शामिल करने पर उन्होंने विशेष बल दिया।
उपवास की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए स्वामी जी ने कहा कि हमारे ऋषि-मुनियों ने उपवास को शरीर की शुद्धि और डिटॉक्स का विज्ञान बताया है। उपवास से पाचन तंत्र को विश्राम मिलता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और कैंसर सहित अनेक रोगों से बचाव में सहायता मिलती है।
योग, प्राणायाम और ध्यान को स्वास्थ्य की कुंजी बताते हुए उन्होंने कहा कि मानसिक तनाव आज कई बीमारियों की जड़ बन चुका है। जब मन शांत होता है, तो शरीर भी स्वस्थ रहता है। योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि संतुलित और सकारात्मक जीवन जीने की कला है।
स्वामी जी ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आधुनिकता को अपनाएँ, लेकिन अपनी सांस्कृतिक जड़ों को न भूलें। भारतीय ऋषि परंपरा में स्वास्थ्य का संपूर्ण विज्ञान निहित है। यदि युवा पीढ़ी प्राकृतिक जीवनशैली, समय पर भोजन, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और सकारात्मक सोच को अपनाए, तो वे स्वयं भी स्वस्थ रहेंगे और समाज को भी स्वस्थ बनाएँगे।
अपने संदेश के अंत में उन्होंने कहा कि रोग से लड़ने से बेहतर है रोग को आने ही न दिया जाए। प्रकृति हमारी सबसे बड़ी चिकित्सक है। विश्व कैंसर दिवस पर सभी को संकल्प लेना चाहिए कि वे पैक्ड और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएँगे, जैविक व ताजा भोजन अपनाएँगे, नियमित योग-प्राणायाम करेंगे और प्रकृति के साथ सामंजस्य में जीवन
