देहरादून

ग्राफिक एरा में आठवाँ ज्योतिष महाकुंभ संपन्न, मुख्यमंत्री धामी व पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने किया उद्घाटन

देहरादून। ग्राफिक एरा सिल्वर जुबली कन्वेंशन सेंटर, ग्राफिक एरा डीम्ड विश्वविद्यालय में आयोजित आठवाँ ज्योतिष महाकुंभ सनातन परंपरा, शास्त्रोक्त ज्ञान और आधुनिक दृष्टिकोण का भव्य, प्रेरणादायक एवं ऐतिहासिक संगम बनकर उभरा। आयोजन के उद्घाटन सत्र में परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का पावन सान्निध्य एवं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि ज्योतिष भारत की प्राचीन वैज्ञानिक परंपरा का महत्वपूर्ण अंग है। यह केवल भविष्य कथन तक सीमित नहीं, बल्कि समय, प्रकृति और मानव जीवन के गहन अध्ययन का विज्ञान है, जो आज भी समाज को दिशा देने की क्षमता रखता है।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने आशीर्वचन में कहा कि “ज्योतिष सनातन धर्म की वह दिव्य धारा है, जो मनुष्य में भय नहीं, बल्कि भाव और विवेक जाग्रत करती है। यह कर्म और काल के बीच संतुलन सिखाती है तथा आत्मबोध का माध्यम है, न कि भाग्य का बंधन।”

उन्होंने कहा कि सनातन ज्योतिष भाग्यवाद नहीं, कर्मवाद का समर्थक है। ज्योतिष अंधविश्वास नहीं, बल्कि आत्मविश्वास जगाने वाली विद्या है, जो विज्ञान की विरोधी नहीं, बल्कि ज्ञान की सहयोगी है। ज्योतिष का उद्देश्य भय नहीं, बल्कि सृष्टि से भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करना है—“असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय” की यात्रा ही ज्योतिष है।

स्वामी जी ने 24 जनवरी 1950 के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसी दिन डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी को स्वतंत्र भारत का प्रथम राष्ट्रपति चुना गया और “जन गण मन” को राष्ट्रगान घोषित किया गया। उन्होंने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी के संस्कार और सांस्कृतिक दृढ़ता को स्मरण किया।

इस अवसर पर श्री अनूप वाजपेयी (संपादक, अमर उजाला), श्री प्रवीण शर्मा (यूनिट हेड, अमर उजाला), प्रो. कमल घनशाला (अध्यक्ष, ग्राफिक एरा ग्रुप), श्री विनीत मिश्रा (मार्केटिंग हेड, अमर उजाला) सहित अनेक गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही।

कार्यक्रम के दौरान श्री चक्र सम्मान, ज्योतिष तपस्वी सम्मान एवं लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड के माध्यम से देशभर से पधारे वरिष्ठ ज्योतिषाचार्यों को सम्मानित किया गया। साथ ही आयोजन के प्रायोजक एवं सहयोगी संस्थाओं को भी सम्मान प्रदान किया गया।

ज्योतिष महाकुंभ के विभिन्न सत्रों में विद्वानों ने वैदिक ज्योतिष, खगोल विज्ञान, कर्म सिद्धांत, ग्रह-नक्षत्र विज्ञान, वास्तु एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण पर शास्त्रोक्त एवं वैज्ञानिक व्याख्यान प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने कहा कि ज्योतिष का उद्देश्य मानव को आत्मनिर्भर, जागरूक और संतुलित बनाना है।

ग्राफिक एरा डीम्ड विश्वविद्यालय द्वारा उपलब्ध कराया गया आधुनिक एवं सुसज्जित मंच इस आयोजन की भव्यता का सशक्त उदाहरण बना। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि जब शिक्षा, मीडिया और आध्यात्म एक साथ आते हैं, तो समाज के लिए सकारात्मक और सार्थक संदेशों का सृजन होता है।

आठवाँ ज्योतिष महाकुंभ आने वाली पीढ़ियों के लिए यह संदेश देता है कि सनातन ज्ञान केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य का पथप्रदर्शक है। यह आयोजन भारतीय ज्योतिष परंपरा के स्वर्णिम अध्याय के रूप में स्मरणीय रहेगा।

इस अवसर पर आचार्य रमेश सेमवाल, आचार्या अनुराधा गोयल, आचार्य लेखराज, आचार्य अजय, आचार्य पुरुषोत्तम गोड़, आचार्य लखन, आचार्य सुशील राज सहित अनेक आचार्य एवं ज्योतिषाचार्यों ने सहभाग किया।

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