स्वामी शुकदेवानंद सरस्वती का निर्वाण महोत्सव श्रद्धा और सेवा के साथ सम्पन्न
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में परम पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी शुकदेवानंद सरस्वती जी महाराज का पावन निर्वाण महोत्सव श्रद्धा, भक्ति, सेवा और सनातन संस्कृति के दिव्य उत्सव के रूप में सम्पन्न हुआ। परमार्थ पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज सहित अनेक संतों के सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने संत को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया।

गुरुपूर्णिमा के अवसर पर शुरू हुए सात दिवसीय अखंड रामायण पाठ का स्वामी शुकदेवानंद सरस्वती जी महाराज की पुण्यतिथि पर वैदिक मंत्रोच्चार और पूर्णाहुति के साथ समापन हुआ। प्रभु श्रीराम के अखंड संकीर्तन, वैदिक ऋचाओं और संतों के सान्निध्य से परमार्थ निकेतन का वातावरण आध्यात्मिक भक्ति से सराबोर रहा। देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं, भक्तों और ऋषिकुमारों ने सामूहिक संकीर्तन में भाग लेकर स्वामी जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
परमार्थ पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने कहा कि स्वामी शुकदेवानंद सरस्वती जी महाराज का जीवन सरलता, सहजता, विद्वता, विनम्रता, सेवा और समर्पण का अद्भुत उदाहरण था। उन्होंने कहा कि स्वामी जी के जीवन में सेवा, समर्पण और स्मरण का अद्भुत समन्वय था। उनका मानना था कि भजन और ईश्वर स्मरण का वास्तविक स्वरूप सेवा के माध्यम से दिखाई देना चाहिए।
स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने कहा कि स्वामी शुकदेवानंद जी प्रत्येक व्यक्ति और सृष्टि के कण-कण में ईश्वर के दर्शन करते थे। वे सत्संग और सेवा के लिए सदैव तत्पर रहते थे तथा उनका उद्देश्य मानव जीवन में आध्यात्मिकता के साथ सेवा और समर्पण की भावना को बढ़ाना था। उन्होंने ऐसे दिव्य महापुरुष को कोटिशः नमन करते हुए भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम में स्वामी ज्योतिर्मयानंद, स्वामी सनातन तीर्थ, स्वामी गंगेश्वरानंद, स्वामी कैवल्यानंद, स्वामी कृष्णानंद, स्वामी ब्रह्म चैतन्य, स्वामी सुभाष, स्वामी चंद्रप्रकाश सहित अनेक संतों का सान्निध्य रहा।
सात दिवसीय अखंड रामायण पाठ में योगदान देने वाले मनोज मिश्रा, देवनाथ दीक्षित, मनोज तिवारी, शिवांशु पटेल, व्यवस्थापक रामअनंत तिवारी, नंदबाला, आचार्य संदीप, आचार्य दीपक शर्मा, सभी ऋषिकुमारों और परमार्थ निकेतन परिवार के सदस्यों ने आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
निर्वाण महोत्सव के अवसर पर आयोजित विशाल भंडारे में संतों, श्रद्धालुओं और भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम के अंत में विश्वशांति, मानवता के कल्याण, प्रकृति संरक्षण, राष्ट्र की समृद्धि और समस्त सृष्टि के मंगल की सामूहिक प्रार्थना की गई।
