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चौंदकोट जनशक्ति मार्ग: श्रमदान से बनी सड़क, सामूहिक संकल्प और सामाजिक क्रांति की मिसाल

सतपुली/पौड़ी। चौंदकोट जनशक्ति मार्ग गढ़वाल के इतिहास में जनसहभागिता, त्याग और एकजुटता का अद्वितीय उदाहरण है। सतपुली से लगभग 3 किमी आगे सतपुली–पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग के जमरिया बैंड से जणदा देवी तक लगभग 33 किमी लंबी यह सड़क स्थानीय लोगों ने बिना किसी सरकारी मदद के केवल श्रमदान से बनाई।

12 फरवरी 1951 को क्षेत्रवासियों ने अपने गांवों को सड़क मार्ग से जोड़ने का ऐतिहासिक संकल्प लिया। पूर्व जिला परिषद चेयरमैन हरेंद्र सिंह रावत, ईड़ा गांव के दर्शन सिंह नेगी और रिंगवाड़ी के मनबर सिंह रावत की पहल पर चौंदकोट जनशक्ति मार्ग समिति का गठन किया गया। इसके बाद हजारों ग्रामीण इस अभियान से जुड़े।

ग्रामीण ढोल–दमाऊ जैसे लोक वाद्य यंत्रों के साथ अपने-अपने घरों से अनाज और औजार लेकर निर्माण कार्य में जुट गए। दिन-रात चले इस श्रमदान में किसी भी प्रकार की मशीन या कारतूस का प्रयोग नहीं हुआ। गैंती, फावड़ा, सब्बल और कुदाल जैसे पारंपरिक औजारों से पहाड़ काटकर मोटरमार्ग तैयार किया गया।

सड़क के समरेखण (अलाइनमेंट) को लेकर कुछ विवाद भी सामने आए, लेकिन विभिन्न पट्टियों के लोगों ने आपसी सहमति से दो मुख्य मार्गों का निर्माण कर एकता का परिचय दिया। इस मार्ग के निर्माण में की गई सटीक इंजीनियरिंग का प्रमाण तब मिला, जब बाद में सरकार द्वारा सड़क को अपने नियंत्रण में लेने पर केवल नाममात्र के सुधार की आवश्यकता पड़ी।

आज के समय में जब छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी सरकारी योजनाओं की प्रतीक्षा की जाती है, चौंदकोट जनशक्ति मार्ग समाज की सामूहिक शक्ति और आत्मनिर्भरता का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह सड़क केवल एक यातायात मार्ग नहीं, बल्कि हजारों मांझियों द्वारा जन्मी सामाजिक क्रांति, त्याग और एकजुटता का जीवंत प्रतीक है।

इस ऐतिहासिक प्रयास से मिलने वाली प्रेरणा का व्यापक स्तर पर प्रसार होना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी सामूहिक संकल्प और श्रमदान की ताकत को समझ सकें।

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