ऋषिकेश

“मृदा प्रदूषण मानव सभ्यता के अस्तित्व पर सबसे बड़ा खतरा: स्वामी चिदानन्द सरस्वती”

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि मृदा—वह धरती, जिस पर संपूर्ण सभ्यता टिकी है—आज गंभीर संकट से गुजर रही है। पंचतत्वों में प्रमुख मानी जाने वाली मृदा केवल मिट्टी का ढेला नहीं, बल्कि सृष्टि की धुरी है, जो अन्न, औषधि, वनस्पति और जीवन की निरंतर धारा को पोषित करती है। परंतु आधुनिक जीवनशैली और प्रदूषण ने इसे तेजी से क्षतिग्रस्त कर दिया है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि हमारी दैनिक गतिविधियाँ धरती की गोद को खोखला कर रही हैं, जिसके परिणामस्वरूप मानवता अस्वस्थ और अस्थिर हो रही है। मृदा को प्रदूषित करना वास्तव में अपने ही जीवन को प्रदूषित करने जैसा है। उन्होंने चेताया कि मृदा प्रदूषण सभ्यता की जड़ों में घुसते उस धीमे जहर की तरह है, जिसे हम अनदेखा कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों, औद्योगिक कचरे, माइक्रोप्लास्टिक, सीवेज और गैर-क्षयशील पदार्थों ने मिट्टी को बीमार बना दिया है। जो मिट्टी कभी जीवन का स्रोत थी, वह आज प्रदूषण के कारण विषाक्त होती जा रही है। मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीव—जो धरती के प्राकृतिक चक्र को संतुलित रखने वाले ‘अदृश्य देवदूत’ हैं—तेजी से नष्ट हो रहे हैं, जिससे धरती का जीवन-तंत्र कमजोर पड़ रहा है।

मृदा को धरती का “पवित्र आंचल” बताते हुए स्वामी जी ने कहा कि इसी मिट्टी से अन्न, औषधियाँ और वनस्पति का जन्म होता है, पर आज यही मिट्टी प्रदूषण के कारण गंभीर रूप से प्रभावित है। उन्होंने कहा कि मृदा प्रदूषण का सबसे खतरनाक असर हमारी थाली पर पड़ता है, क्योंकि रसायनों से दूषित खाद्य पदार्थ सीधे हमारे शरीर में विषाक्तता फैलाते हैं।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि मिट्टी केवल खाद्य उत्पादन का आधार नहीं, बल्कि पृथ्वी की सबसे बड़ी प्राकृतिक फिल्टर है, जो पानी को शुद्ध कर भूजल में पहुंचाती है और जलचक्र को संतुलित रखती है। जब मिट्टी प्रदूषित होती है, तो रसायन और भारी धातुएँ भूजल में घुलकर नदियों और जलस्रोतों को भी दूषित कर देती हैं। इससे न केवल भूजल स्तर गिरता है, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी तेजी से खराब होती है।

उन्होंने कहा कि मिट्टी का स्वास्थ्य बिगड़ने का अर्थ है—सभ्यता की जड़ों का कमजोर होना। इसलिए मृदा संरक्षण केवल सरकारों या किसानों का दायित्व नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता का सामूहिक उत्तरदायित्व है।

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