अंतर्राष्ट्रीय

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती एवं डा. साध्वी भगवती सरस्वती का बैंकाक प्रवास

भारतीय संस्कृति का वैश्विक स्वरूप बैंकाक में शानदार रूप से प्रकट

बैंकॉक। ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं डिवाइन शक्ति फाउंडेशन की अध्यक्ष डा. साध्वी भगवती सरस्वती इन दिनों बैंकाक प्रवास पर हैं। स्वर्णभूमि एयरपोर्ट पर पहुंचते ही उन्हें भारतीय संस्कृति की सौम्य, आध्यात्मिक एवं अद्भुत झलकियाँ देखने को मिलीं। स्थानीय लोगों ने दोनों संतों का आत्मीय स्वागत किया और उनके आगमन से गदगद दिखाई दिए।

अपने प्रवास के दौरान उन्होंने बैंकाक–थाईलैंड के राजपरिवार, पटेल परिवार तथा अनेक स्थानीय लोगों से भेंट की। स्थानीय नागरिकों ने बताया कि बैंकाक में नवरात्रि पर्व भारत की ही भांति शुचिता, पवित्रता और सात्त्विकता के साथ मनाया जाता है। यहां भारतीय परंपराओं का स्वाभाविक और जीवंत विस्तार हर ओर दिखाई देता है।

स्वामी चिदानंद सरस्वती और साध्वी भगवती ने बताया कि बैंकाक में रहने वाले भारतीय संस्कृति के उपासकों का उत्साह और समर्पण अत्यंत प्रेरणादायक है। नवरात्रि के दौरान वे पूरे नौ दिनों तक सात्त्विक आहार ग्रहण करते हैं तथा नवमी पर भगवान शिव और श्रीराम की भव्य रथयात्रा निकालते हैं। इन आयोजनों में भारतीय मूल के पुरोहितों के साथ-साथ बड़ी संख्या में थाई नागरिक भी श्रद्धापूर्वक भाग लेते हैं, जिससे पूरा वातावरण भारतीय संस्कृति की भक्ति और भावनाओं से सराबोर हो उठता है।

थाई राजपरिवार में भी भारतीय संस्कृति के प्रति गहरी श्रद्धा है। राजपरिवार स्वयं को लव–कुश वंशज मानता है। विगत माह राजमाता के देहांत पर पूज्य स्वामी जी और साध्वी जी ने पूरे राजपरिवार से मिलकर उनकी आत्मशांति हेतु प्रार्थना की। इस अवसर पर थाईलैंड में आई बाढ़ से हुए नुकसान को लेकर भी विशेष प्रार्थना की गई।

बैंकाक के विभिन्न मंदिरों में भगवान शिव, गणेश, श्रीराम, माता काली एवं शक्ति स्वरूपों की पूजा अत्यंत श्रद्धा के साथ होती है। यहां संस्कृत मंत्रों का उच्चारण बौद्ध एवं सनातन दोनों ही परंपराओं में समान श्रद्धा से किया जाता है। यह बौद्ध–सनातन परंपराओं के सौहार्दपूर्ण संगम का अद्भुत उदाहरण है।

 

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि थाई लोगों ने भारतीय संस्कृति को केवल अपनाया ही नहीं, बल्कि उसे अपने हृदय तथा समाज में सुरक्षित भी रखा है। पटाया की ओर जाते समय उन्हें प्रकृति–संरक्षण के उत्कृष्ट उदाहरण भी देखने को मिले—हरा–भरा पर्यावरण, पर्वत, और संरक्षण के विविध प्रयास यहां की चेतना को और भी उज्जवल बनाते हैं।

उन्होंने बताया कि भारत में जहां भगवान ब्रह्मा का विख्यात मंदिर पुष्कर में स्थित है, वहीं बैंकाक में जगह–जगह भगवान ब्रह्मा के भव्य मंदिर दिखाई देते हैं। यह भारतीय संस्कृति की वैश्विक स्वीकृति और विस्तार का प्रमाण है।

साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि बैंकाक के लगभग 80% होटल भारतीय परिवारों द्वारा आयोजित डेस्टिनेशन वेडिंग्स के कारण भरे रहते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि उत्तराखंड को भी प्रकृति, गंगा और हिमालय की दिव्यता के साथ विश्व–स्तरीय डेस्टिनेशन वेडिंग सेंटर के रूप में विकसित किया जा सकता है।

बैंकाक में पूज्य स्वामी जी एवं साध्वी जी पटेल परिवार के आतिथ्य में तेजस और जानकी के विवाह समारोह में सम्मिलित हुए। पटेल परिवार भारतीय संस्कृति के संवर्धन और संरक्षण में लंबे समय से कार्यरत है। लगभग 46 वर्ष पूर्व पीट्सबर्ग (अमेरिका) में स्थापित हिंदू–जैन मंदिर के निर्माण में और अब उसके शिखर निर्माण में इस परिवार ने विशेष योगदान दिया है।

पूज्य स्वामी जी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि बैंकाक में भारतीयता, अध्यात्म और संस्कृति का जो उत्सव देखने को मिलता है, वह केवल सांस्कृतिक संवाद नहीं बल्कि मानव–हृदयों में बसे सनातन मूल्यों की जीवंतता की अनंत यात्रा है।

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