विश्व सनातन महापीठ के शिला पूजन समारोह में संतों का महासंगम, स्वामी चिदानन्द सरस्वती हुए विशेष आमंत्रित
हरिद्वार। तीर्थ सेवा न्यास, हरिद्वार द्वारा आयोजित विश्व सनातन महापीठ – युगधर्म की पुनर्स्थापना के पवित्र संकल्प हेतु भव्य शिला पूजन समारोह का आयोजन श्रद्धा और दिव्यता के अद्भुत संगम के रूप में सम्पन्न हुआ। यह कार्यक्रम संतसमाज, आचार्यों, महंतों, वैष्णव परंपरा के पूज्य संतों, शिक्षाविदों और विशिष्ट विभूतियों की विराट उपस्थिति का साक्षी बना।

इस दिव्य अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में पधारे। उन्होंने अपने उद्बोधन एवं आशीर्वाद में कहा कि विश्व सनातन महापीठ केवल एक आध्यात्मिक केंद्र नहीं, बल्कि “एक विश्व, एक धर्म, एक ध्वज, एक ग्रन्थ, एक विधान” के ध्येय के साथ मानवता के वैश्विक कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने वाला युगप्रवर्तक संकल्प है।
शिला पूजन समारोह में देशभर से विराजमान अनेक संत-महात्माओं, वैष्णव परंपरा के पूज्य संतों एवं विविध मठ–मंदिरों के आचार्यों ने सहभाग कर समारोह की दिव्यता को बढ़ाया। कार्यक्रम का वातावरण वेदमंत्रों, आशीर्वचनों और सनातन परंपरा की आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा।
कार्यक्रम में यह संदेश गूँजा कि सनातन धर्म का आदर्श केवल पंथ या परंपरा नहीं, बल्कि मानवता, शांति, एकता और विश्वबंधुत्व का शाश्वत मार्ग है। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए विश्व सनातन महापीठ का निर्माण एक ऐतिहासिक अध्याय के रूप में प्रारम्भ किया जा रहा है।
तीर्थ सेवा न्यास, हरिद्वार द्वारा महापीठ के निर्माण की विधिवत शुरुआत की गई। इसके संस्थापक एवं संरक्षक बाबा हठयोगी जी महाराज, राष्ट्रीय महामंत्री, अखिल भारतीय वैष्णव अखाड़ा परिषद् ने कहा कि यह महापीठ आने वाली पीढ़ियों के लिए अध्यात्म, सेवा और संस्कारों का वैश्विक केंद्र बनेगा।
समारोह में विभिन्न परंपराओं के संतों, वैष्णव आचार्यों, महंतों, शिक्षाविदों तथा अनेक विशेष अतिथियों ने मिलकर युगधर्म की पुनर्स्थापना और सनातन के वैश्विक संदेश के प्रसार का संकल्प लिया।
अंत में पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने मानवता एवं विश्वशांति के लिए प्रार्थना की और समस्त संत समाज तथा आयोजकों को इस पवित्र पहल के लिए साधुवाद दिया।
