लखपति दीदी योजना की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने दिए समन्वित कार्य के निर्देश
कृषि, उद्यान, पशुपालन व आजीविका योजनाओं के एकीकृत क्रियान्वयन पर जोर
पौड़ी। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया की अध्यक्षता में आज जिला कार्यालय स्थित एनआईसी कक्ष में लखपति दीदी योजना की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्वयं सहायता समूहों के आर्थिक सशक्तिकरण एवं स्थानीय उत्पादों के माध्यम से आत्मनिर्भर आर्थिकी के लक्ष्य पर विस्तार से चर्चा हुई।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि कृषि, उद्यान, पशुपालन और आजीविका योजनाओं का समन्वित क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त दिशा मिल सके। उन्होंने कहा कि जनपद में कृषि एवं उद्यान से जुड़ी योजनाओं के समन्वय से आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए आयाम स्थापित किए जा सकते हैं।
उद्यान विभाग को निर्देशित किया गया कि श्रीनगर, लैंसडाउन, कोटद्वार एवं यमकेश्वर जैसे बड़े बाजारों की मांग के अनुरूप सब्जी उत्पादन हेतु सामुदायिक फेडरेशनों को प्रेरित किया जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि कलेक्शन सेंटर, कोल्ड स्टोरेज और रेफ्रिजरेटेड वैन की व्यवस्था कर उत्पादों की गुणवत्ता एवं शेल्फ-लाइफ को बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने परियोजना प्रबंधक (रीप) को रेफ्रिजरेटेड वैन की खरीद एवं उत्पादन क्षेत्रों में कलेक्शन सेंटर विकसित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि ऐसे कृषि उत्पादों को बढ़ावा दिया जाए जिन्हें जंगली जानवरों से नुकसान की संभावना न हो। कृषि अधिकारियों को ऐसे फसलों के विस्तार पर बल देने को कहा गया जो किसानों के लिए स्थायी आय का स्रोत बन सकें।
पॉलीहाउस उपयोग की निगरानी पर असंतोष जताते हुए जिलाधिकारी ने उद्यान विभाग से पिछले पाँच वर्षों में वितरित पॉलीहाउस की स्थिति रिपोर्ट दो दिन में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
कृषि विभाग को फार्म मशीनरी बैंक से उपलब्ध उपकरणों की गुणवत्ता पर किसानों से फीडबैक लेने और मशीनरी चयन किसानों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार करने को कहा गया।
एनआरएलएम व यूएसआरएलएम के अंतर्गत सक्रिय सामुदायिक फेडरेशनों के सुदृढ़ीकरण पर बल देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि इन फेडरेशनों को तकनीकी, प्रशिक्षण व विपणन सहायता निरंतर दी जाए।
उन्होंने परियोजना निदेशक, डीआरडीए को निर्देश दिए कि साबुन, शैम्पू, हर्बल आदि उत्पादक समूहों के उत्पादों का लैब टेस्ट और प्रमाणन शीघ्र कराया जाए, ताकि बाजार में उनकी विश्वसनीयता और प्रतिस्पर्धा बढ़ सके।
जिलाधिकारी ने कहा कि पारंपरिक उत्पादों में सुधार एवं स्थानीय संसाधनों पर आधारित नए उत्पादों का विकास ही किसानों और महिला समूहों की आर्थिकी में वास्तविक परिवर्तन ला सकता है।
विकास विभाग को निर्देशित किया गया कि सामुदायिक स्तरीय फेडरेशनों (सीएलएफ) को ऐसे उत्पादों के निर्माण हेतु प्रेरित किया जाए जिनका कच्चा माल स्थानीय रूप से उपलब्ध हो।
बैठक में बताया गया कि एनआरएलएम के तहत जिले में 7,215 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनमें 44,551 महिला सदस्य हैं। इनमें से 25,138 महिलाएँ “लखपति दीदी” के रूप में उभर चुकी हैं।
जिलाधिकारी ने सभी समूहों को प्राथमिक, मध्यम एवं उत्कृष्ट श्रेणियों में वर्गीकृत करने के निर्देश दिए ताकि उनकी उत्पादकता के अनुसार सहायता दी जा सके।
बैठक में थलीसैंण में स्थापित घी ग्रोथ सेंटर को दुग्ध उत्पादन अधिक क्षेत्र में स्थानांतरित करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुनवन्त, सहायक निदेशक डेयरी नरेंद्र लाल, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विशाल शर्मा, जिला मत्स्य अधिकारी अभिषेक मिश्रा, प्रबंधक उद्योग उपासना सिंह, कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी अरविंद भट्ट, परियोजना प्रबंधक (रीप) कुलदीप बिष्ट सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
सूचना एवं लोक संपर्क विभाग, पौड़ी गढ़वाल
