उत्तराखंडहरिद्वार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर हरिद्वार में विशेष संत संगोष्ठी सम्पन्न

भैयाजी जोशी, स्वामी चिदानन्द सरस्वती, स्वामी रामदेव सहित अनेक संतों का पावन सान्निध्य

हरिद्वार। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में हरिद्वार में एक विशेष संत संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी माननीय श्री सुरेश (भैयाजी) जोशी जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, योगऋषि स्वामी रामदेव जी, स्वामी श्री राजराजेश्वरानंद जी, महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद जी, स्वामी रूपेन्द्र प्रकाश जी, स्वामी ललितानंद जी सहित अनेक पूज्य संतों का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ।

संगोष्ठी में संघ की सौ वर्षों की प्रेरक यात्रा को श्रद्धा और सम्मान के साथ स्मरण किया गया। वक्ताओं ने कहा कि आदरणीय डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी द्वारा 1925 में प्रज्वलित की गई छोटी सी ज्योति आज एक विश्वव्यापी प्रकाश पुंज बन चुकी है। संघ भारतीय संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय चेतना का अक्षयवट है, जिसने समाज को एकता, सेवा और संस्कार का अमृत प्रदान किया है।

वक्ताओं ने कहा कि संघ केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक धरोहर है जिसने भारतीय समाज को उसकी जड़ों से जोड़े रखा है। संघ ने यह सिद्ध किया है कि राष्ट्र का सशक्तिकरण केवल राजनीति से नहीं, बल्कि समाज की जागृति, संगठन शक्ति और संस्कारों से संभव है। शाखाओं और शैक्षणिक माध्यमों से संघ ने अनुशासन, सेवा और राष्ट्रभावना के बीज बोकर करोड़ों युवाओं को अपने मूल से जोड़ा है।

संतों ने अपने संबोधन में कहा कि संघ के स्वयंसेवक सदैव राष्ट्र सेवा की अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे हैं। चाहे 2001 का गुजरात भूकंप हो, 2013 की केदारनाथ आपदा, वैश्विक महामारी या अन्य कोई प्राकृतिक संकट — संघ परिवार ने भोजन वितरण, रक्तदान, राहत शिविरों के संचालन और निराश्रितों की सेवा में अग्रणी भूमिका निभाई है। उनकी निःस्वार्थ सेवा ही उनके जीवन का यज्ञ है।

संगोष्ठी में यह भी स्पष्ट किया गया कि संघ का हिन्दूत्व किसी संकीर्णता का प्रतीक नहीं, बल्कि “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना का प्रसारक है। संघ का दृष्टिकोण मानवता के कल्याण पर आधारित है। जब भारत विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर है, ऐसे समय में संघ का योगदान और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

यह शताब्दी वर्ष न केवल भारत के लिए, बल्कि सम्पूर्ण विश्व के लिए प्रेरणा का संदेश लेकर आया है — कि जड़ों से जुड़े रहकर ही हम वैश्विक उजाला फैला सकते हैं।

संगोष्ठी के अंत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उन लाखों स्वयंसेवकों को श्रद्धांजलि दी गई जिन्होंने अपने जीवन को “इदम् राष्ट्राय इदम् न मम्” की भावना से राष्ट्र और मानवता की सेवा में समर्पित किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रभक्ति और सेवा की भावना से ओत-प्रोत माहौल में हुआ।

इस अवसर पर जिला संचालक हरिद्वार डॉ. यतीन्द्र नागयान, धार्मिक श्रेणी प्रमुख सम्पर्क विभाग हरिद्वार श्री स्वामी साधनानन्द जी एवं उनकी पूरी टीम का सराहनीय योगदान रहा।

सूचना एवं लोक संपर्क विभाग, हरिद्वार

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