ऋषिकेश

विश्व मानक दिवस पर उत्तराखण्ड में प्रेरक आयोजन — गुणवत्ता और संस्कृति का संगम

देहरादून/ऋषिकेश। देवभूमि उत्तराखण्ड में आज विश्व मानक दिवस 2025 का भव्य और प्रेरणादायक आयोजन हिमालयन कल्चरल सेंटर में हुआ। यह कार्यक्रम तकनीकी मानकों और गुणवत्ता के महत्व को रेखांकित करने के साथ-साथ उत्तराखण्ड की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर के संगम का प्रतीक रहा।

कार्यक्रम का शुभारम्भ राज्यपाल ले. जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, सांसद नरेश बंसल, सांसद कल्पना सैनी, बीआईएस प्रमुख सौरभ तिवारी एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। अतिथियों का पारंपरिक स्वागत पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया।

सभी गणमान्य अतिथियों ने “एक पौधा माँ के नाम” अभियान के तहत पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण और विकास के संतुलित दृष्टिकोण का संदेश दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान से हुई। इसके उपरांत भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की ओर से संस्थान की गतिविधियों और उपलब्धियों पर आधारित एक प्रेरक वीडियो प्रस्तुति दी गई, जिसमें यह बताया गया कि कैसे मानक समाज के प्रत्येक क्षेत्र — उद्योग, स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और उपभोक्ता सुरक्षा — को सशक्त बनाते हैं।

बीआईएस देहरादून के प्रमुख सौरभ तिवारी ने स्वागत संबोधन में कहा कि “मानक केवल तकनीकी शब्द नहीं हैं, बल्कि यह समाज में विश्वास और गुणवत्ता की आधारशिला हैं।”

इस अवसर पर बीआईएस की वार्षिक रिपोर्ट का विमोचन किया गया तथा उन राज्य अधिकारियों को सम्मानित किया गया जिन्होंने उत्तराखण्ड में मानक जागरूकता बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान दिया।

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि “गुणवत्ता किसी देश की पहचान बनाती है। जब हमारी सेवाएँ और उत्पाद मानकों पर खरे उतरते हैं, तभी राष्ट्र आत्मनिर्भर और विश्वसनीय बनता है। गुणवत्ता केवल व्यापार नहीं, यह विश्वास है।”

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा —

“अगर हमें जीवन को मंगल बनाना है तो उसकी एक ही शर्त है — मानक और मानवता। मानवता होगी तो मानकता बची रहेगी। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में यह सोच साकार हो रही है कि ‘मेरे लिये क्या’ से आगे बढ़कर ‘मेरे द्वारा क्या’ किया जाए।”

उन्होंने कहा कि “गुणवत्ता और मानक केवल उद्योग की भाषा नहीं, बल्कि जीवन की संस्कृति हैं। जिस प्रकार योग ने भारत को वैश्विक पहचान दी, उसी तरह भारतीय मानक विश्व में नई पहचान बना रहे हैं।”

सांसद नरेश बंसल ने कहा कि “भारत आज Made in India से आगे बढ़कर Made in India – Made to Standard की दिशा में अग्रसर है।”

सांसद कल्पना सैनी ने कहा कि “मानक केवल तकनीकी नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा का भी आधार हैं।”

कार्यक्रम के अंत में बीआईएस के संयुक्त निदेशक श्याम कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और कहा कि ऐसे आयोजन आमजन में गुणवत्ता और मानक के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सहायक होंगे।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और अतिथियों की गरिमामयी विदाई के साथ हुआ। यह दिवस उत्तराखण्ड में गुणवत्ता, संस्कृति और विकास के समन्वय का प्रेरक प्रतीक बन गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *