देहरादून

UKSSSC पेपर लीक: बॉबी पंवार के गंभीर आरोप, कहा– मुख्यमंत्री करोड़ों की धांधली बचाने को रच रहे षड्यंत्र

देहरादून। परेड ग्राउंड में देर रात आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के अध्यक्ष बॉबी पंवार ने सरकार और आयोग पर तीखे हमले बोले। उन्होंने आरोप लगाया कि बेरोजगार संघ का प्रतिनिधिमंडल जब मुख्यमंत्री से मिला और पेपर लीक मामले की सीबीआई जांच व परीक्षा निरस्त करने की मांग की, तो मुख्यमंत्री ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।

बच्चों को बसों में भरकर धरना स्थल भेजने का आरोप

बॉबी पंवार ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि इसके बाद सरकार ने लक्षर (हरिद्वार) क्षेत्र से करीब 235 बच्चों को 5 से 6 बसों में भरकर एकता विहार धरना स्थल भेजा। ये सभी बच्चे प्रथम और द्वितीय सेमेस्टर के छात्र थे, जो स्कूल यूनिफॉर्म में थे। उनसे परीक्षा परिणाम जारी करने के नारे लगवाए गए और सचिव शैलेश बगौली को ज्ञापन भी दिलवाया गया।

ज्ञापन में लिखा गया कि हाल ही में आयोजित UKSSSC परीक्षा पूर्णतः निष्पक्ष, पारदर्शी और नकल-विहीन रही है तथा आयोग पर छात्रों का पूरा भरोसा है, इसलिए परीक्षा निरस्त न की जाए।

स्वाभिमान मोर्चा ने रोकी बसें

पंवार ने बताया कि जब बेरोजगार संघ के कार्यकर्ताओं को इस घटनाक्रम की भनक लगी और वे धरना स्थल पहुंचे तो वहां भारी पुलिस बल तैनात था। इसी बीच बच्चों को अचानक बसों में बैठाकर हरिद्वार भेजा जाने लगा, लेकिन स्वाभिमान मोर्चा की ऋषिकेश टीम की तत्परता से बसों को नेपाली फार्म पर रोक लिया गया।

बच्चों का बड़ा खुलासा

जब बच्चों से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें खेलकूद प्रतियोगिता और मुख्यमंत्री पुरस्कार वितरण कार्यक्रम के नाम पर बुलाया गया था। बच्चों ने साफ कहा कि हमसे परीक्षा परिणाम जारी करने के पक्ष में नारे लगवाए गए।

फर्जी मंच के इस्तेमाल का आरोप

बॉबी पंवार ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के लिए सरकार ने एक फर्जी संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा छात्र मंच का गठन किया। बसों पर इसी नाम के पर्चे लगे हुए थे और ज्ञापन भी इसी नाम से सौंपा गया। जबकि, सरकार के आधिकारिक पेज उत्तराखंड DIPR पर ‘उत्तराखंड छात्र प्रतियोगी परीक्षा संघ’ के नाम से परीक्षा परिणाम जारी करने का अनुरोध डाला गया है।

मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाते हुए बॉबी पंवार ने कहा –

“इतना बड़ा षड्यंत्र रचकर मुख्यमंत्री खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। यदि केवल छोटी-मोटी धांधली हुई होती तो अब तक परीक्षा रद्द हो चुकी होती और अगली तिथि घोषित हो जाती। लेकिन इसमें करोड़ों रुपए की रिश्वतखोरी फंसी हुई है, इसलिए परीक्षा को बचाने के लिए षड्यंत्र रचे जा रहे हैं। आगे भी सरकार ऐसे और षड्यंत्र करेगी।”

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