परमार्थ निकेतन में नवरात्रि के अवसर पर स्टेम सेल थैरेपी कैंप का उद्घाटन, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक सेवा का संगम
ऋषिकेश। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन में सेवा और आध्यात्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया। नौ दिवसीय इस महोत्सव को माँ दुर्गा की आराधना और शक्ति की उपासना के रूप में समर्पित किया गया।

नवरात्रि के पहले दिन, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और साध्वी भगवती सरस्वती जी के सान्निध्य में स्टेम सेल थैरेपी कैंप का दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन किया गया। यह कैंप आधुनिक विज्ञान और सनातन संस्कृति की सेवा-परंपरा का अद्भुत संगम है। स्वामी जी ने कहा कि शरीर की स्वास्थ्य संपन्नता धर्म और कर्तव्य पालन का आधार है, और यही भाव इस कैंप की नींव में निहित है।
कैंप में उत्तराखंड की आपदा पीड़ितों की आत्मा की शांति और प्रभावित परिवारों की सुख-समृद्धि हेतु विशेष प्रार्थना भी की गई। स्वामी जी ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं ने प्रदेश के जीवन और घर-परिवार को गहरी चोट पहुँचाई है, और माँ से प्रार्थना है कि प्रभावित परिवारों को शक्ति, साहस और संबल प्रदान करे।
स्वामी जी ने नवरात्रि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि नौ रातों में जीवन के तीन गुणों – तमोगुण, रजोगुण और सतोगुण – की यात्रा होती है। पहले तीन दिन माँ दुर्गा की उपासना तमोगुण का नाश करती है, अगले तीन दिन माँ लक्ष्मी रजोगुण को संतुलित करती हैं, और अंतिम तीन दिन माँ सरस्वती सतोगुण को जागृत करती हैं। यह पर्व अज्ञान से ज्ञान, असंतुलन से सामंजस्य और दुर्बलता से शक्ति की ओर बढ़ने की आध्यात्मिक साधना है।
साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि स्टेम सेल थैरेपी कैंप केवल चिकित्सा का केंद्र नहीं, बल्कि नयी आशा का दीपक है। आधुनिक विज्ञान और प्राचीन दर्शन के संगम से समाज में नयी ऊर्जा, प्रेरणा और दृष्टि का संचार होता है।
कैंप में डाॅ. सुनीता राणा अग्रवाल, आर. अग्रवाल हॉस्पिटल्स एवं जीन रिसर्च फाउंडेशन, बैंगलोर की टीम ने इम्यून बूस्टर स्टेम सेल इंजेक्शन के माध्यम से निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा प्रदान की।
परमार्थ निकेतन का यह प्रयास केवल शारीरिक उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य की दिशा में भी समाज को जागरूक करने का संदेश देता है।
