गोरखपुर में भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार जी की 133वीं जयंती महोत्सव का भव्य आयोजन
ऋषिकेश/गोरखपुर। भारतीय संस्कृति के पुरोधा, महान साहित्यकार, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं कल्याण पत्रिका के संस्थापक संपादक, श्रद्धेय भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार जी की 133वीं जयंती महोत्सव के अवसर पर गोरखपुर स्थित गीतावाटिका में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने की। इस अवसर पर श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र, अयोध्या के महासचिव श्री चंपतराय जी, कथावाचक श्री नरहरि दास जी, राष्ट्रीय संगठन सचिव अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, नई दिल्ली डा. बालमुकुन्द पाण्डेय, हेड नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट एम्स नई दिल्ली डा. ओम जी उपाध्याय, प्रो. डा. जी.के. रथ सहित अनेक संत, विद्वान और विशिष्ट विभूतियाँ उपस्थित रहीं।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने भाईजी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि 1918 में स्थापित गीता प्रेस ने भाईजी की करुणा और समर्पण से सेवा की परंपरा प्रारंभ की, जिसने भारतीय समाज को नई चेतना प्रदान की। करोड़ों प्रतियों में प्रकाशित गीता, रामचरितमानस, उपनिषद, पुराण और अन्य ग्रंथों ने न केवल भारत, बल्कि विश्वभर में सनातन संस्कृति का अमृत पहुँचाया।
उन्होंने कहा कि भाईजी द्वारा संपादित मासिक पत्रिका कल्याण भारतीय परिवारों की संस्कृति की जीवनरेखा बन गई, जिसने धर्म, भक्ति और संस्कारों की अलख जगाई। भाईजी का जीवन राष्ट्रकल्याण और सनातन धर्म की सेवा का अद्वितीय उदाहरण है।
श्री चंपतराय जी ने कहा कि भाईजी ने भारत की आत्मा को संजोने का कार्य किया और कल्याण पत्रिका वास्तव में समाज के कल्याण का साधन बनी।
श्री नरहरि दास जी ने कहा कि भाईजी के साहित्य ने करोड़ों हृदयों में भक्ति और संस्कृति का दीप जलाया।
डा. बालमुकुन्द पाण्डेय, डा. ओम जी उपाध्याय और प्रो. डा. जी.के. रथ ने भाईजी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए समाज को उनसे प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
श्री रसेन्दु फोगला और श्री उमेश कुमार सिंहानिया ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि भाईजी द्वारा बोए गए बीज आज भारतीय संस्कृति के विशाल वटवृक्ष के रूप में फल-फूल रहे हैं।
