विश्व उद्यमी दिवस पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती का संदेश : भारत केवल बाजार नहीं, बल्कि परिवार और प्रेरणा का स्रोत
ऋषिकेश। विश्व उद्यमी दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भारत की उद्यमिता केवल व्यापार या धन अर्जन तक सीमित नहीं, बल्कि सेवा, समाज उत्थान और विश्वकल्याण का मार्ग है। उन्होंने कहा कि भारत केवल एक देश नहीं, बल्कि एक विचार है और यहाँ उद्यमिता का अर्थ मानवीय मूल्यों, आध्यात्मिकता और समर्पण से जुड़ा रहा है।

स्वामी चिदानन्द ने कहा कि भारत की उद्यमिता की परंपरा सनातन काल से है। नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय केवल शिक्षा केंद्र नहीं, बल्कि वैश्विक ज्ञान उद्यम थे। प्राचीन भारत का वाणिज्य मसालों, वस्त्रों, धातुओं और शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध था, वहीं योग, आयुर्वेद और वेदांत जैसे अनमोल उपहार भारत ने दुनिया को दिए।
उन्होंने कहा कि भारत ने शून्य का आविष्कार कर गणित और आधुनिक विज्ञान को नई दिशा दी। “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना ने विश्व को यह संदेश दिया कि पूरी दुनिया एक परिवार है। यही भारत की असली उद्यमिता है, जहाँ लाभ केवल भौतिक नहीं बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक भी है।
स्वामी चिदानन्द ने कहा कि 21वीं सदी का भारत डिजिटल क्रांति, ग्रीन एनर्जी और सतत विकास का नेतृत्व कर रहा है। स्टार्टअप्स के क्षेत्र में भारत “लोकल से ग्लोबल” का मंत्र लेकर आगे बढ़ रहा है। युवा और नारी शक्ति मिलकर नए भारत का भविष्य गढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज हमें ऐसी उद्यमिता की आवश्यकता है जो पर्यावरण की रक्षा करे, गाँव और शहर को जोड़े और जिसमें हर युवा व महिला को अवसर मिले। ऐसा उद्यम जो धर्म और धन, दोनों का संतुलन साधते हुए मानवता पर आधारित अर्थव्यवस्था बनाए।
स्वामी चिदानन्द ने कहा कि विश्व उद्यमी दिवस केवल उत्सव नहीं बल्कि जिम्मेदारी का स्मरण है। उद्यम वही है जो सबके जीवन में प्रकाश और समृद्धि लाए। भारत का संदेश है— “सफलता साझा करो, समृद्धि सबके साथ बाँटो और नवाचार में संस्कृति व नैतिकता को शामिल करो।”
