डॉ. शक्तिशैल कपरवान के मार्गदर्शन में “ग्रामीण युवा वाहिनी” का गठन
गैरराजनीतिक संगठन का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं की समस्याओं पर चर्चा एवं समाधान
यमकेश्वर। उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में दिन प्रतिदिन सामाजिक आर्थिक हर प्रकार की चुनौती बढ़ती जा रही है। ग्रामीण युवा बेरोजगारी से सबसे अधिक दुखी है, पलायन एवं जंगली जानवरों के बढ़ने से कृषि, बागवानी, पशुपालन सब कुछ चौपट हो गया है। विकास कार्य और रोजगार के साधन शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित रह गए हैं, गांव में रहने वाले युवाओं का विवाह भी नहीं हो पा रहा हैं, इसके अलावा जो युवा शहरों में काम कर रहे हैं, उनकी भी कोटद्वार ऋषिकेश, देहरादून, हल्द्वानी आदि शहरों में जमीन मकान है तो तभी शादी की बात आगे बढ़ रही है। हर तरफ गांव में रहने वाले युवाओं की उपेक्षा हो रही है, इसलिए ग्रामीण युवा हताश और निराश है।

यह एक ज्वलंत सामाजिक मुद्दा है, इसकी गंभीरता को समझते हुए, ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं की गांवों में चर्चा हुई, कि शहरी क्षेत्रों की तरह ग्रामीण क्षेत्रों का भी विकास होना चाहिए।
इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन के वरिष्ठ नेता तथा ईमानदार छवि के लीडर, विचारक डॉ. शक्तिशैल कपरवाण के मार्गदर्शन में गैर राजनीतिक मंच “ग्रामीण युवा वाहिनी” का संचालन किया जाय। ग्रामीण युवाओं की पीड़ा है कि उनके लिए रोजगार की व्यवस्था नहीं है ,गांव के अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं, अभी तक कई गांव सड़क मार्ग से नहीं जुड़े हैं , पानी , बिजली, मोबाइल नेटवर्क की सुविधा ठीक से नहीं है। आखिर गांव के युवा करें तो क्या करें इसलिए उन्होंने एक नया मार्ग चुना है। इस गैर राजनीतिक संगठन “ग्रामीण युवा वाहिनी” का उद्देश्य युवाओं में आत्मविश्वास अर्जित करना है।
