अदवाणी क्षेत्र में मनाया गया आड़ा दिवस। जंगलों को आग से बचाने के लिए ग्रामीणों को दिलाई शपथ
पौड़ी। वनाग्नि रोकथाम और वन संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग पौड़ी द्वारा अदवाणी क्षेत्र में आड़ा दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें विभिन्न गांवों के उपस्थित ग्रामीणों को जंगल को आग से बचाने की शपथ भी दिलाई गई।
डीएफओ गढ़वाल स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि शीतलाखेत मॉडल के तर्ज पर रानीगढ़ अदवाणी वनबंधु समिति का पूर्व में गठन किया गया है। जिसमें 30 गांवों के प्रधान व 28 वन सरपंच शामिल हैं। उन्होंने बताया कि अदवाणी वन क्षेत्र एक आरक्षित वनखंड है, जिसका भौगोलिक विस्तार 1805 हेक्टेयर में फैला हुआ है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से बांज, बुरांश, काफल और चीड़ जैसी महत्वपूर्ण पादप प्रजातियों से आच्छादित है। वनाग्नि की घटनाओं को देखते हुए इस क्षेत्र में जनसहभागिता के माध्यम से प्रभावी रोकथाम और प्रबंधन की आवश्यकता है।

इस दौरान उन्होंने समिति में शामिल ग्रामीणों को जंगलों में लगी आग की सूचना कंट्रोल रूम को देने को कहा। उन्होंने यह भी कहा कि कोई व्यक्ति आग लगाते हुए पकड़ा जाता है, तो उसकी जानकारी भी दें। कहा कि जो गांव जंगल से सटे हैं वह अपने खेतों में आड़ा बिल्कुल भी न जलाएं। कहा कि आड़ा जलाने से आग की लपटे जंगलों में पहुंच सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में तापमान को देखते हुए यह आड़ा फूंकने के लिए सबसे उपयुक्त समय है। यदि इसे नियंत्रित रूप से अभी किया जाए, तो ग्रीष्मकाल में वनाग्नि की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। डीएफओ ने सभी नागरिकों से अपील है कि वे वन संरक्षण और वनाग्नि रोकथाम में सक्रिय भूमिका निभाएं।
इस मौके पर डीएफओ सिविल एवं सोयम पवन नेगी, एसडीओ आयषा बिष्ट सहित वन विभाग के अधिकारी व ग्रामीण मौजूद रहे।
