उत्तराखंड

खराब मौसम में उड़ान की अनुमति देने वालों की जवाबदेही तय हो, हादसे की उच्चस्तरीय जांच की मांग

देहरादून। चमोली जनपद में बद्रीनाथ धाम से देहरादून लौट रहा हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने से पायलट समेत छह लोगों की मौत पर मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति के संस्थापक संयोजक मोहित डिमरी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

मोहित डिमरी ने उत्तराखंड में लगातार हो रहे हेलीकॉप्टर हादसों पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि हर दुर्घटना के बाद जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया जाता है, कुछ समय के लिए उड़ानों पर रोक भी लगती है, लेकिन बाद में व्यवस्था फिर पहले जैसी हो जाती है। आखिर पहाड़ों में हवाई सुरक्षा के साथ कब तक समझौता होता रहेगा?

उन्होंने सवाल उठाया कि जब मौसम विभाग की ओर से ऑरेंज अलर्ट जारी था और भारी बारिश-बर्फबारी के साथ दृश्यता बेहद कम थी, तब हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने की अनुमति किसने दी? नागरिक उड्डयन विभाग मुख्यमंत्री के पास होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस मामले में सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए। खराब मौसम में उड़ान की अनुमति देने वाले अधिकारियों और संबंधित हेलीकॉप्टर कंपनी की भूमिका की जांच होनी चाहिए।

डिमरी ने कहा कि मुनाफा कमाने की होड़ में यात्रियों की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए हेलीकॉप्टर सेवाओं के लिए सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करना जरूरी है। खराब मौसम और कम दृश्यता में उड़ानों पर प्रभावी रोक सुनिश्चित करने के साथ विजुअल फ्लाइट रूल्स (वीएफआर) के मानकों का कड़ाई से पालन होना चाहिए।

उन्होंने मुख्यमंत्री से हादसे की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच निर्धारित समयसीमा में पूरी कराने की मांग की। साथ ही कहा कि जांच में हेलीकॉप्टर कंपनी, संचालन प्रबंधन या अनुमति देने वाले अधिकारियों की लापरवाही सामने आने पर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

मोहित डिमरी ने कहा कि उत्तराखंड में हवाई सेवाओं का विस्तार यात्रियों की सुरक्षा की कीमत पर नहीं होना चाहिए। सरकार को प्रभावी ‘नो-फ्लाई प्रोटोकॉल’ तैयार करना चाहिए, ताकि खराब मौसम में किसी भी दबाव या व्यावसायिक हित के चलते उड़ानों का संचालन न हो। इंसान की जिंदगी किसी भी आर्थिक मुनाफे से बढ़कर है और सरकार को इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।

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