ऋषिकेश

शौर्य दिवस पर परमार्थ निकेतन पहुंचे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के सैकड़ों जवान, गंगा आरती और योग-साधना में लिया भाग

ऋषिकेश। भारतीय पैदल सेना दिवस एवं शौर्य दिवस के अवसर पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के सैकड़ों जवानों का दल चार संकाय सदस्यों के साथ परमार्थ निकेतन पहुंचा। यहां जवानों ने डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती के सान्निध्य में दिव्य गंगा आरती, सत्संग, योग, ध्यान और विभिन्न आध्यात्मिक गतिविधियों में सहभागिता की।

यह दल भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अंतर्गत संचालित मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, नई दिल्ली में सीसीवायडब्ल्यूआई पाठ्यक्रम का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है। इसमें देश के छह केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कार्मिक शामिल हैं। इस दो दिवसीय भ्रमण का उद्देश्य प्रतिभागियों को योग की समृद्ध परंपरा, शिक्षण पद्धतियों और संस्थागत गतिविधियों से परिचित कराना है।

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने शौर्य दिवस पर भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना के साहस, पराक्रम और राष्ट्र के प्रति समर्पण को नमन किया। उन्होंने कहा कि सैनिकों के कारण ही देश की सीमाएं सुरक्षित हैं और नागरिक निर्भय होकर जीवन व्यतीत कर पाते हैं। जवान केवल वेतन के लिए नहीं, बल्कि वतन के लिए जीते हैं। राष्ट्र की रक्षा उनके लिए केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि मातृभूमि के प्रति सर्वोच्च निष्ठा और साधना है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि सैनिकों का शौर्य, अनुशासन और बलिदान हमें राष्ट्र को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता है। राष्ट्र का सम्मान और सुरक्षा हम सभी का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने वीर जवानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए सशक्त, सुरक्षित और समरस भारत के निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया।

डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती ने वीर जवानों के साहस, अटूट संकल्प और निःस्वार्थ राष्ट्रसेवा को नमन करते हुए कहा कि सैनिक केवल सीमाओं के प्रहरी नहीं, बल्कि राष्ट्र के विश्वास, साहस और स्वाभिमान के जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि देश के जवान अपने परिवारों से दूर रहकर कठिन परिस्थितियों में मातृभूमि की रक्षा करते हैं। उनके त्याग और समर्पण के प्रति पूरा राष्ट्र नतमस्तक है। सैनिकों का सम्मान करना और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना जीवनभर निभाया जाने वाला राष्ट्रीय धर्म है।

इस दल में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, सशस्त्र सीमा बल और असम राइफल्स के जवान शामिल रहे। पाठ्यक्रम के समन्वयक डॉ. विनय भारती हैं, जबकि शिक्षकों में वायु सहरावत, कर्मवीर आर्य और वसुधा शामिल हैं। परमार्थ निकेतन की ओर से योगाचार्य गंगा नन्दिनी ने दो दिवसीय यात्रा का नेतृत्व किया।

भारतीय पैदल सेना दिवस एवं शौर्य दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन में आयोजित यह आध्यात्मिक सहभागिता जवानों के लिए योग, ध्यान, आत्मानुशासन और मानसिक संतुलन को समझने के साथ राष्ट्रसेवा के संकल्प को और मजबूत करने का अवसर बनी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *