गंगा तट पर गूंजी रामभक्ति: परमार्थ निकेतन में जनजातीय माँ शबरी रामलीला का भव्य समापन
ऋषिकेश। माँ गंगा के पावन तट, परमार्थ निकेतन के दिव्य एवं आध्यात्मिक वातावरण में 11 अक्टूबर से आयोजित माँ शबरी श्रीरामलीला का भावपूर्ण समापन हो गया। इस अवसर पर जनजातीय एवं आदिवासी कलाकारों ने अपनी उत्कृष्ट अभिनय कला, लोक परंपराओं और श्रीराम भक्ति के माध्यम से प्रभु श्रीराम, माता सीता, हनुमान जी तथा माता शबरी के दिव्य प्रसंगों को जीवंत कर दिया।

परमार्थ पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित इस रामलीला ने भक्ति, समर्पण, सामाजिक समरसता और प्रकृति संरक्षण का अनूठा संदेश दिया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि माँ शबरी का जीवन भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में श्रद्धा, धैर्य और निष्काम प्रेम का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने रेखांकित किया कि जनजातीय समुदाय सदियों से जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के संवाहक रहे हैं, जिनकी जीवनशैली से आज पूरे विश्व को प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के समापन पर स्वामी जी ने मैनेजिंग ट्रस्टी सैस फाउंडेशन एवं मां शबरी रामलीला के अध्यक्ष शक्ति बख्शी सहित पूरी आयोजन समिति, निदेशक डॉ. अनु, उपनिदेशक प्रवीण और सभी साथी कलाकारों का आभार व्यक्त किया। उत्कृष्ट प्रस्तुति देने वाले सभी कलाकारों और आयोजकों को रुद्राक्ष का दिव्य पौधा एवं अंगवस्त्र भेंट कर भावभीनी विदाई दी गई।

