यूकेडी की ‘कुर्सी’ लौटी, अब जनता तक पहुंच होगी आसान
देहरादून। उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) को एक बार फिर कुर्सी चुनाव चिह्न मिल गया है। चुनाव चिह्न की वापसी से पार्टी को मतदाताओं के बीच अपनी पहचान स्थापित करने में आसानी हो सकती है। बार-बार चुनाव चिह्न बदलने से मतदाताओं के बीच पैदा होने वाला असमंजस भी इससे दूर होने की उम्मीद है।

उत्तराखंड की क्षेत्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान रखने वाले यूकेडी के लिए चुनाव चिह्न का महत्व काफी अहम है। चुनाव में मतदाता पार्टी की विचारधारा और प्रत्याशी के साथ ही चुनाव चिह्न के आधार पर भी अपनी पसंद तय करते हैं। ऐसे में कुर्सी चिह्न वापस मिलने से पार्टी को मतदाताओं तक अपना संदेश पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव चिह्न की पहचान मतदान के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यूकेडी के लिए कुर्सी चिह्न का प्रचार करना और इसे मतदाताओं की स्मृति में स्थापित करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
अब देखना होगा कि कुर्सी चुनाव चिह्न की वापसी का लाभ यूकेडी आगामी चुनावों में किस तरह उठा पाती है और इसे मतदाताओं के समर्थन में बदलने में कितनी सफल रहती है।

