यूरोपीय साधकों ने भरत मंदिर में किए दर्शन, वैदिक मंत्रों से हुआ स्वागत
ऋषिकेश। यूरोप की आध्यात्मिक सनातन धर्म यात्रा पर आए विदेशी साधकों का ऋषिकेश स्थित ऐतिहासिक श्री भरत मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार और पुष्पवर्षा के साथ स्वागत किया गया। हंगरी से आए महामंडलेश्वर स्वामी सच्चिदानंद प्रेम आचार्य के सान्निध्य में पहुंचे साधकों ने भगवान हृषिकेश नारायण और भरत भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। श्री भरत मंदिर के महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य ने साधकों का पुष्पहार पहनाकर स्वागत किया और उन्हें भगवान भरत जी का स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

तुलसी मानस मंदिर के महंत रवि प्रपन्नाचार्य ने बताया कि सात दिवसीय प्रवास पर आए यूरोपीय साधकों ने मंदिर के पौराणिक महत्व की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान उन्होंने श्री भरत मंदिर पब्लिक स्कूल, भरत मंदिर संस्कृत महाविद्यालय और श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज का भ्रमण भी किया। साधकों ने विद्यार्थियों से भारतीय संस्कृति, सभ्यता और पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के विषयों पर संवाद किया।
महंत रवि प्रपन्नाचार्य ने कहा कि विभिन्न देशों में वैदिक ज्ञान, सनातन संस्कृति, योग और आध्यात्मिक साधना का संदेश प्रसारित कर रहे स्वामी सच्चिदानंद प्रेम आचार्य के मार्गदर्शन में विदेशी साधकों का भरत मंदिर पहुंचना भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना का प्रतीक है। इटली, स्लोवाकिया, हंगरी और फ्रांस से आए साधकों की सनातन धर्म के प्रति आस्था भारत और यूरोप के बीच सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों को मजबूत करती है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति के प्रति विदेशी साधकों का समर्पण प्रेरणादायक है। अनेक साधकों ने सनातन परंपरा से जुड़कर भारतीय आध्यात्मिक नाम अपनाए हैं। इनमें कृष्णानंद, वेद विद्या, दयामयी, नित्य प्रभा, देव मुक्ता, शाम्भवी, प्रेम अनन्या, वैष्णवी, सहदेव, नीलिमा देवी, त्रिपुरा सुंदरी, मधुसूदन और सुदेवी भारती शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म के वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।
इस अवसर पर सनातन धर्म की परंपराओं, आध्यात्मिक चेतना और भारतीय संस्कृति के संदेश को विश्वभर में प्रसारित करने की कामना की गई।

