ऋषिकेश

आध्यात्मिक ऊर्जा से अभिभूत हुए जगदीप धनखड़, परमार्थ निकेतन से भावपूर्ण विदाई

ऋषिकेश। भारत के 14वें पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ एवं उनकी पत्नी श्रीमती सुदेश धनखड़ ने आध्यात्मिकता, श्रद्धा और सेवा से परिपूर्ण प्रवास के बाद मंगलवार को परमार्थ निकेतन से भावपूर्ण विदाई ली।

परमार्थ पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती एवं डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती ने उन्हें आत्मीय भावों के साथ विदाई दी। इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने श्री धनखड़ दंपती को इलायची की सुगंधित माला एवं रुद्राक्ष का पौधा भेंट किया।

अपने प्रवास के दौरान जगदीप धनखड़ ने परमार्थ निकेतन में मां गंगा की आरती, विश्व शांति हवन, सत्संग एवं विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रमों में सहभाग किया। उन्होंने भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और सेवा के प्रति अपनी श्रद्धा एवं भावनाएं व्यक्त कीं।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भारतीय संस्कृति जीवन को देखने और जीने के साथ-साथ सर्वकल्याण की भावना सिखाती है। इसकी आत्मा में सेवा, संस्कार, करुणा, सह-अस्तित्व और वसुधैव कुटुम्बकम् का भाव निहित है। उन्होंने कहा कि अपनी सांस्कृतिक विरासत को केवल जानना ही नहीं, बल्कि उसे जीवन में उतारकर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है।

डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि अपनी जड़ों से जुड़ना अपने भविष्य को मजबूत करना है। भारतीय संस्कृति युवाओं को केवल परंपराएं नहीं देती, बल्कि पहचान, आत्मविश्वास और जीवन की दिशा भी प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि तकनीक दुनिया को बदलने की शक्ति देती है, जबकि संस्कार यह तय करने की दृष्टि देते हैं कि दुनिया को किस दिशा में बदलना है।

वहीं, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने परमार्थ निकेतन की आध्यात्मिक ऊर्जा, मां गंगा की दिव्यता तथा स्वामी चिदानन्द सरस्वती के स्नेह एवं मार्गदर्शन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि परमार्थ निकेतन में मिली आध्यात्मिक अनुभूति उनके हृदय में सदैव जीवंत रहेगी।

आध्यात्मिक एवं आत्मीय वातावरण के बीच जगदीप धनखड़ एवं श्रीमती सुदेश धनखड़ परमार्थ निकेतन से विदा हुए।

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