ऋषिकेश

सनातन ज्ञान की विरासत को मिला नया सम्मान, जगदीप धनखड़ को भेंट किए ‘इनसाइक्लोपीडिया ऑफ हिन्दूइज्म’ के 11 खंड

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में मंगलवार को भारत की सनातन ज्ञान-परंपरा, संस्कृति, दर्शन और अध्यात्म के संरक्षण एवं वैश्विक प्रसार से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर सामने आया। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष एवं इंडिया हेरिटेज रिसर्च फाउंडेशन के संस्थापक-अध्यक्ष, परमार्थ पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ जी को ‘इनसाइक्लोपीडिया ऑफ हिन्दूइज्म’ के सभी 11 खंड भेंट किए।

इस अवसर पर श्री जगदीप धनखड़ जी ने सपरिवार विश्व शांति हवन में सहभाग किया। कार्यक्रम में सनातन ज्ञान, भारतीय संस्कृति और सभ्यता की वैश्विक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के महत्व पर चर्चा हुई।

1000 से अधिक विद्वानों का योगदान

‘इनसाइक्लोपीडिया ऑफ हिन्दूइज्म’ को भारत की प्राचीन ज्ञान-परंपरा का व्यापक और शोधपरक दस्तावेज बताया गया। इसके निर्माण में विश्वभर के 1000 से अधिक विद्वानों ने योगदान दिया है। लगभग 7000 प्रविष्टियों के माध्यम से भारतीय दर्शन, अध्यात्म, इतिहास, विज्ञान, कला, स्थापत्य, संस्कृति, परंपराओं और जीवन-दृष्टि के विभिन्न आयामों को समाहित किया गया है।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने वर्ष 1987 में हिंदू धर्म एवं भारतीय ज्ञान-परंपरा के प्रामाणिक विश्वकोश की आवश्यकता का संकल्प लिया था। वर्षों तक चले शोध, संवाद, संपादन और संकलन के बाद यह विराट संकल्प 11 खंडों के रूप में साकार हुआ। पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी ने भी शोध, संपादन, समन्वय और संकलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भारत की सांस्कृतिक स्मृति का दस्तावेज

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी ज्ञान-परंपरा है। अपनी संस्कृति, इतिहास, शास्त्रों और जीवन-दृष्टि को समझकर ही आत्मविश्वास के साथ भविष्य का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने ‘इनसाइक्लोपीडिया ऑफ हिन्दूइज्म’ को भारत की हजारों वर्षों की चेतना, चिंतन, साधना और संस्कृति को एक व्यापक ज्ञान-संकलन में समेटने का प्रयास बताया।

उन्होंने कहा कि यह विश्वकोश केवल हिंदू धर्म को धार्मिक परंपरा के रूप में प्रस्तुत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय सभ्यता और ज्ञान-संस्कृति के विविध पक्षों को अकादमिक एवं शोधपरक रूप में विश्व के सामने रखने का प्रयास है।

राष्ट्रपति भवन से लंदन तक पहुंची ज्ञान-यात्रा

‘इनसाइक्लोपीडिया ऑफ हिन्दूइज्म’ की यात्रा कई महत्वपूर्ण पड़ावों से जुड़ी रही है। इसका अंतरराष्ट्रीय संस्करण राष्ट्रपति भवन में तत्कालीन राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी को भेंट किया गया था। इसके बाद नई दिल्ली के विज्ञान भवन में इसका लोकार्पण हुआ। वहीं लंदन में तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने भी इसके अंतरराष्ट्रीय संस्करण का शुभारंभ किया था।

श्री जगदीप धनखड़ को सभी 11 खंड भेंट किए जाने के अवसर को भारत की प्राचीन सनातन ज्ञान-परंपरा, वर्तमान सार्वजनिक जीवन और भावी पीढ़ियों के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में देखा गया।

यह अवसर इस संदेश का भी प्रतीक बना कि भारत की संस्कृति जितनी प्राचीन है, उतनी ही जीवंत और सार्वभौमिक भी है तथा उसका ज्ञान केवल भारत की धरोहर नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

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