स्थानांतरण पर छलकीं आंखें, ढोल-दमाऊ के साथ दी प्रधानाध्यापिका को भावुक विदाई
द्वारीखाल/पौड़ी। राजकीय प्राथमिक विद्यालय भरग्वाड़ीखाल में वर्षों तक अपनी सेवाएं देकर बच्चों के जीवन को संवारने वाली प्रधानाध्यापिका श्रीमती दुर्गा काला के स्थानांतरण पर विद्यालय परिसर भावुक हो उठा। विदाई के दौरान छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। स्थिति ऐसी बनी कि शिक्षिका श्रीमती दुर्गा काला समेत विदाई देने पहुंचे लोगों की आंखों से भी आंसू छलक पड़े।

श्रीमती दुर्गा काला ने विद्यालय में अपने कार्यकाल के दौरान केवल बच्चों को पढ़ाया ही नहीं, बल्कि अभिभावकों और ग्रामीणों के साथ भी आत्मीय संबंध बनाए। उनके सरल व्यवहार, समर्पण और उत्कृष्ट सेवाओं ने उन्हें विद्यालय और क्षेत्र के लोगों के दिलों में विशेष स्थान दिलाया। यही वजह रही कि स्थानांतरण की खबर के बाद ग्रामीणों ने उन्हें औपचारिक विदाई देने के बजाय परिवार के सदस्य की तरह सम्मान के साथ विदा किया।
विदाई के मौके पर ग्रामीणों ने ढोल-दमाऊ की थाप के बीच प्रधानाध्यापिका को ससम्मान विदा किया। उनके लिए वाहन की व्यवस्था की गई और ग्रामीण उन्हें उनके घर तक छोड़ने के लिए साथ गए। इस दौरान माहौल पूरी तरह भावुक हो गया। कोई शिक्षिका के साथ बिताए पलों को याद कर रहा था तो किसी की आंखें उन्हें विदा करते हुए नम थीं।
ग्रामीणों का कहना था कि शिक्षक का रिश्ता केवल विद्यालय और किताबों तक सीमित नहीं होता। शिक्षक बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावकों, गांव और पूरे क्षेत्र से सीधे जुड़ा होता है। जब कोई शिक्षक वर्षों तक ईमानदारी और समर्पण के साथ सेवा करता है तो वह धीरे-धीरे परिवार का हिस्सा बन जाता है। श्रीमती दुर्गा काला की विदाई के दौरान उमड़ा स्नेह इसी विश्वास और आत्मीय रिश्ते की मिसाल रहा।
बंदीला, भरग्वाड़ी एवं दनिक के ग्रामीणों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि विद्यालय में उनके द्वारा दी गई सेवाओं और बच्चों के प्रति उनके स्नेह को लंबे समय तक याद किया जाएगा। भावुक माहौल में हुई यह विदाई क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी रही।
