परमार्थ विद्या मंदिर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जन्माष्टमी
ऋषिकेश। परमार्थ विद्या मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा, उल्लास और आध्यात्मिक भाव के साथ मनाया गया। विद्यालय के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को धर्म, प्रेम, विवेक, करुणा, साहस और कर्तव्य के संस्कारों को जीवन में उतारने के संकल्प के रूप में मनाया।

इस अवसर पर विद्यालय परिसर में श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की झांकी, भक्ति एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। नन्हे-मुन्ने बच्चों ने कृष्ण-राधा का रूप धारण कर सभी का मन मोह लिया। बच्चों की प्रस्तुतियों ने पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया।
कार्यक्रम के दौरान श्रीकृष्ण के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा गया कि जन्माष्टमी केवल भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव नहीं, बल्कि अंधकार के बीच प्रकाश, अधर्म के विरुद्ध धर्म और भय के बीच विश्वास का संदेश देती है। श्रीकृष्ण का जन्म कारागार के अंधकार में होना यह संदेश देता है कि विपरीत परिस्थितियां भी दिव्यता और सत्य के मार्ग को रोक नहीं सकतीं।
विद्यालय में बच्चों को श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं से भी परिचित कराया गया। वक्ताओं ने कहा कि श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व प्रेम, करुणा, साहस, कर्तव्य और धर्म का समन्वय है। भगवद्गीता के माध्यम से उन्होंने अर्जुन को मोह, भय और भ्रम से ऊपर उठकर कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
विद्यालय परिवार ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों और युवाओं के सामने तनाव, असफलता का भय, सोशल मीडिया का आकर्षण और सही-गलत के बीच बढ़ता भ्रम जैसी चुनौतियां हैं। ऐसे में श्रीकृष्ण की शिक्षाएं उन्हें अपने कर्तव्य पर विश्वास रखने, कर्म को प्राथमिकता देने और जीवन में विवेक बनाए रखने की प्रेरणा देती हैं।
जन्माष्टमी के अवसर पर परमार्थ विद्या मंदिर का पूरा परिसर भक्ति, उल्लास और संस्कारों से सराबोर नजर आया।
