उच्च शिक्षण संस्थानों में सुविधाओं के विस्तार को 46 लाख स्वीकृत
स्मार्ट क्लास, आधुनिक उपकरणों और निर्माण-मरम्मत कार्यों से सुदृढ़ होंगे महाविद्यालय व तकनीकी संस्थान
पौड़ी। जनपद के उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र-छात्राओं को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन ने पहल तेज कर दी है। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने विभिन्न महाविद्यालयों एवं तकनीकी संस्थानों में निर्माण, मरम्मत कार्यों तथा आधुनिक उपकरणों की व्यवस्था के लिए करीब 46 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की है।

जिला प्रशासन के अनुसार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुरूप उच्च शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक एवं रोजगारपरक बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। संस्थानों की आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के आधार पर सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ कौशल, रोजगार एवं स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।
इन संस्थानों को मिली धनराशि
राजकीय महाविद्यालय थलीसैंण में आधुनिक शौचालय निर्माण के लिए 11.45 लाख रुपये तथा भक्त दर्शन महाविद्यालय जयहरीखाल में दो कक्षों की मरम्मत के लिए 9.95 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
इसके अलावा केंद्रीय विद्यालय कोटद्वार के लिए 4.60 लाख रुपये, राजकीय महाविद्यालय कण्वघाटी कोटद्वार के लिए 4.25 लाख रुपये और पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल राजकीय महाविद्यालय कोटद्वार के लिए 6.71 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
वहीं राजकीय पॉलिटेक्निक पाबौ, राजकीय महाविद्यालय कल्जीखाल, राजकीय महाविद्यालय पाबौ, राजकीय पॉलिटेक्निक सतपुली तथा गुरु गोरखनाथ महाविद्यालय बिथ्याणी, यमकेश्वर में विभिन्न विकास कार्यों और आधुनिक उपकरणों की व्यवस्था के लिए कुल 8.28 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
शिक्षा को रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने पर जोर
जिलाधिकारी ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने का माध्यम बननी चाहिए। इसी उद्देश्य से उच्च शिक्षण संस्थानों में आधारभूत सुविधाओं के साथ स्मार्ट क्लास, डिजिटल संसाधन, करियर काउंसलिंग, कौशल विकास, प्लेसमेंट और स्वरोजगार से जुड़े अवसरों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि दूरस्थ एवं पर्वतीय क्षेत्रों के महाविद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को भी आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। संस्थानों की आवश्यकताओं के अनुसार चरणबद्ध ढंग से सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
