नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पुण्यतिथि पर परमार्थ निकेतन से भावपूर्ण श्रद्धांजलि
ऋषिकेश। स्वतंत्रता संग्राम के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पुण्यतिथि पर परमार्थ निकेतन में उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर आज की गंगा आरती नेताजी सुभाष चंद्र बोस की स्मृति को समर्पित रही। श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान उनके राष्ट्रप्रेम, त्याग, अदम्य साहस और स्वतंत्रता के लिए किए गए संघर्ष को याद किया गया।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के ऐसे महान योद्धा थे, जिन्होंने स्वतंत्रता को केवल राजनीतिक लक्ष्य नहीं, बल्कि राष्ट्र के आत्मसम्मान और स्वाभिमान से जोड़ा। उनका जीवन दृढ़ संकल्प, साहस और राष्ट्र के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने की प्रेरणा देता है।
उनका प्रसिद्ध आह्वान, “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा”, उस दौर में भारतीयों के भीतर स्वतंत्रता की भावना और आत्मविश्वास जगाने वाली हुंकार बना। आजाद हिंद फौज के माध्यम से नेताजी ने देशवासियों को एकजुट कर स्वतंत्रता के लिए संघर्ष का नया अध्याय लिखा। उनका उद्घोष “जय हिंद” आज भी राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति का प्रतीक है।
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष एवं परमार्थ पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत की उस विराट चेतना के प्रतीक हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानती। उनका जीवन युवाओं को राष्ट्रसेवा, साहस, अनुशासन और संकल्प की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता असंख्य ज्ञात-अज्ञात वीरों के त्याग और बलिदान का परिणाम है। नेताजी इस अमर परंपरा के ऐसे तेजस्वी नक्षत्र हैं, जिनका प्रकाश आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता रहेगा।
परमार्थ निकेतन से नेताजी सुभाष चंद्र बोस को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके राष्ट्रभक्ति, त्याग और अदम्य साहस के आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया गया।
